लेखक परिचय

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान

फ़िरदौस ख़ान युवा पत्रकार, शायरा और कहानीकार हैं. आपने दूरदर्शन केन्द्र और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों दैनिक भास्कर, अमर उजाला और हरिभूमि में कई वर्षों तक सेवाएं दीं हैं. अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया है. ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन केन्द्र से समय-समय पर कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहता है. आपने ऑल इंडिया रेडियो और न्यूज़ चैनल के लिए एंकरिंग भी की है. देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं के लिए लेखन भी जारी है. आपकी 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' नामक एक किताब प्रकाशित हो चुकी है, जिसे काफ़ी सराहा गया है. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल सहित अन्य टेलीविज़न चैनलों के लिए स्क्रिप्ट लेखन भी कर रही हैं. उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल संपादन और लेखन के लिए आपको कई पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है. इसके अलावा कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी शिरकत करती रही हैं. कई बरसों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है. आप कई भाषों में लिखती हैं. उर्दू, पंजाबी, अंग्रेज़ी और रशियन अदब (साहित्य) में ख़ास दिलचस्पी रखती हैं. फ़िलहाल एक न्यूज़ और फ़ीचर्स एजेंसी में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं.

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फ़िरदौस ख़ान

आख़िर एक बार फिर प्याज़ अवाम को महंगाई के आंसू रुला रही है. अभी दो दिन पहले देशभर की मंडियों में प्याज़ 20 रुपये किलो मिल रही थी. लेकिन जैसे ही ख़बरिया चैनलों ने चिल्ला-चिल्लाकर बताना शुरू किया कि देश की राजधानी दिल्ली में प्याज़ 80 से 100 किलो रुपये बिक रही है तो कुछ ही घंटों में देशभर में प्याज़ की क़ीमत आसमान छूने लगी. आड़तियों ने प्याज़ की जमाखोरी शुरू कर दी.

गौरतलब है कि देशभर में प्याज़ की क़ीमतें पिछले कुछ दिनों में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. महाराष्ट्र का नासिक जो प्याज़ का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है वहां भी प्याज़ 70 रुपये किलो बिक रही है, जबकि राजधानी दिल्ली में प्याज़ की क़ीमतें 80 से सौ रुपये तक पहुंच गई है. क़ाबिले-गौर है कि 1998 में प्याज़ की आसमान बढ़ी क़ीमतों ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था.

सनद रहे प्याज़ निर्यात की प्रक्रिया न्यूनतम निर्यात मूल्य के आधार पर नियंत्रित होती है. ये मूल्य नाफ़ेड दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर तय करता है. प्याज़ के निर्यात के लिए निर्यातकों को नाफ़ेड से प्रमाण-पत्र लेना होता है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सहकारिता वितरण फ़ेडरेशन (नाफ़ेड) से कहा है कि वो निर्यातकों को प्याज़ निर्यात करने की मंज़ूरी न दे. सरकार ने प्याज़ का न्यूनतम निर्यात मूल्य 525 डॉलर प्रति टन से बढ़ाकर 1200 डॉलर प्रति टन यानी क़रीब 54 हज़ार रुपए प्रति टन कर दिया गया है, ताकि नाफ़ेड से प्रमाण-पत्र व्यापारी देश से बाहर प्याज़ न भेज पाएं.

हालांकि सोमवार को बुलाई आपात बैठक में केंद्र सरकार फ़िलहाल प्याज़ का निर्यात बंद करने का फ़ैसला कर चुकी है. सरकार 15 जनवरी तक निर्यात परमिट जारी नहीं करेगी. कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि प्याज़ की क़ीमतें अभी कुछ दिनों तक और ऐसी ही बढ़ी हुई रह सकती हैं. और प्याज़ के दामों में अगले 3 हफ़्ते में सुधार होगा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और राजस्थान में मॉनसून में भारी बारिश की वजह से प्याज़ की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है. वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि प्याज़ के दाम जमाखोरी की वजह से बढ़े हैं.

पिछले माह नवंबर में हुई बेमौसम की बरसात की वजह से प्याज़ के उत्पादन में गिरावट आई है. देश की कई कृषि उत्पादन बाजार समितियों में प्याज़ का भाव 7100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. प्याज़ उत्‍पादन के मामले में देश में महाराष्‍ट्र सबसे आगे है. यहां नासिक प्याज़ का सबसे बड़ा बाजार है. महाराष्‍ट्र की लासलगांव मंडी एशिया की सबसे बड़ी प्याज़ मंडी है. आज यहां प्याज़ के दाम 6299 रुपये प्रति क्विंटल, उमराने में 7100 रुपये, पिम्‍पलगांव में 6263 रुपये, मनमाड़ में 6450 रुपये और नंदगांव में 5000 रुपये हो गए हैं. फ़िलहाल हालात से निपटने के लिए पड़ौसी मुल्क पकिस्तान से प्याज़ मंगाई गई है. अमृतसर में सीमा शुल्क विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी मुताबिक़ पाकिस्तान से प्याज़ के कई ट्रक भारत आ चुके हैं. एक ट्रक में पांच से 15 टन प्याज़ है. पाकिस्तान से यहां तक प्याज़ के आने की लागत 18 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम होती है, जिसमें सीमा शुल्क, उपकर, परिवहन और हैंडलिंग की लागत शामिल है.

नाफ़ेड ने राजधानी दिल्ली के बाशिंदों को राहत देने के लिए में प्याज़ की बिक्री 35 से 40 रुपए प्रति किलोग्राम की क़ीमत पर करने का ऐलान कर दिया है. राष्ट्रीय राजधानी में नाफ़ेड और एनसीसीएफ के 25 स्टोर हैं. देश के दूसरे राज्यों की अवाम का क्या होगा? प्याज़ के दाम बढ़ने से जहां होटल वाले परेशान हैं, वहीं गृहिणियों का बजट भी बिगड़ गया है. शाकाहारी तो बिना प्याज़ के कुछ दिन काम चला सकते हैं, लेकिन मांसाहारियों के लिए प्याज़ के बिना एक दिन भी गुज़ारना मुश्किल है.

फ़िलहाल, प्याज़ की बढ़ी क़ीमतों पर क़ाबू पाने की सरकारी कवायद जारी है. जमाखोरी के मद्देनज़र छापामारी के भी निर्देश दिए गए हैं. उधर दूसरी तरफ़ प्याज़ को लेकर सियासी रोटियां भी सेंकी जाने लगी है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्याज़ की क़ीमतों में हुई भारी वृद्धि के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की आर्थिक नीतियों को मुख्य रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि सरकार द्वारा समय रहते एहतियाती क़दम न उठाए जाने की वजह से प्याज़ की क़ीमतें आसमान छू रही हैं. बहरहाल प्याज़ क्या-क्या रंग दिखाती है, देखते रहिए.

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3 Comments on "छोटी प्याज़ ने बड़ों-बड़ों को रुलाया"

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Himwant
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मै माँ भारती का पुत्र आपको संदेश देता हुं की आप एक महिने के लिए प्याज खाना छोड दें। यह माँ का आदेश है।

दिवस दिनेश गौड़
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श्री आर. सिंह जी से पूर्णत: सहमती…प्याज के दाम बढ़ना महज़ एक छल है आवाम का ध्यान भ्रष्टाचार से हटाने के लिए…

आर. सिंह
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पता नहीं मेरा अनुमान कहाँ तक सही है पर मुझे तो लगता है प्याज की कीमत बढ़ी नहीं है ,बल्कि सरकार द्वारा बढाई गयी है.जैसा की लेखिका ने जिक्र किया है,प्याज की कीमतों के चलते बार बार सरकारे गिरी हैं,पर वे किसकी सरकारे थी?उस समय माना यह गया था की कांग्रेस का प्याज पर इतना नियंत्रण है की वह जब चाहे तब इसकी कीमत बढवा सकती है.क्या यह नहीं लगता की इस बार भी वही किया गया है?दूसरों की सरकार गिराने के लिए नहीं,पर अपनी सरकार को बचाने केलिए.जनता का ध्यान बिभिन्न घोटालों से हटाने के लिए..आप में से कोई… Read more »
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