लेखक परिचय

अरविन्‍द विद्रोही

अरविन्‍द विद्रोही

एक सामाजिक कार्यकर्ता--अरविंद विद्रोही गोरखपुर में जन्म, वर्तमान में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में निवास है। छात्र जीवन में छात्र नेता रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक हैं। डेलीन्यूज एक्टिविस्ट समेत इंटरनेट पर लेखन कार्य किया है तथा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा लगाया है। अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 1, अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 2 तथा आह शहीदों के नाम से तीन पुस्तकें प्रकाशित। ये तीनों पुस्तकें बाराबंकी के सभी विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मुफ्त वितरित की गई हैं।

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अरविन्द विद्रोही

 

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने नए रूप में एक अभिभावक की भूमिका में उत्तर-प्रदेश की समाजवादी सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव , मंत्रियों , विधायकों , संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को उत्तर-प्रदेश में वर्तमान सरकार के गठन के पश्चात् से ही अनवरत मार्ग निर्देशित करते चले आ रहे हैं । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में उत्तर-प्रदेश की सरकार को जनता की उम्मीदों को ,अपने वायदों को , घोषणा पत्र को अति शीघ्र पूरा करने व भ्रष्टाचार से अपने को दूर रखने की स्पष्ट चेतावनी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी की हालिया संपन्न बैठक में दी ।

उत्तर -प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में भ्रष्ट नौकरशाहों-मंत्रियों की कारगुजारियों से त्रस्त होकर सड़क पर जनहित के लिए संघर्ष कर रहे समाजवादी कार्यकर्ताओं की लगन ,समर्पण से प्रभावित होकर आम जनमानस ने सत्तारूढ़ बसपा की जगह समाजवादी पार्टी को उत्तर-प्रदेश में हुकूमत की बागड़ोर सौंपी थी । समाजवादी पार्टी के सर्वे-सर्वा मुलायम सिंह यादव के ही शब्दों में ,-” सपा को सभी जातियों और वर्गों ने वोट दिया तभी बहुमत की सरकार बनी , हमारे मंत्री ,विधायक व कार्यकर्ता घमण्ड न करें । ” मुलायम सिंह यादव एक कुशल संगठनकर्ता , दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व के संकल्पित जन-नेता हैं ,यह उन्होंने अपने व्यक्तिगत-राजनैतिक जीवन के प्रत्येक मोड़ पर साबित कर दिखाया है । संकट व परीक्षा की प्रत्येक घड़ी में धरती पुत्र की उपाधि से नवाज़े गए डॉ लोहिया के सबसे बड़े जनाधार वाले अनुयायी मुलायम सिंह ने न तो अपना संयम खोया और न अपने संकल्पित-संघर्षमयी मार्ग से विचलित ही हुआ । डॉ राममनोहर लोहिया के समाजवादी आन्दोलन व संघर्ष की विरासत को सहेजने की जद्दो-जहद के ही कारण संभवता प्रचण्ड बहुमत हासिल होने के पश्चात् युवा चेहरा अखिलेश यादव को उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का कार्य मुलायम सिंह यादव ने किया था । पूर्ववर्ती बसपा सरकार के शासन काल में चले अनवरत संघर्षों के दौरान अखिलेश यादव समाजवादियों ,युवाओं व आम नागरिकों की उम्मीदों के केंद्र बिंदु बनकर तेजी से राजनैतिक परिदृश में उभरे व चमके। इसी चमक और आम जनता की उम्मीदों को भाँपते हुए मुलायम सिंह ने भविष्य की राजनीति के आधार को पुख्ता करने के लिए उत्तर-प्रदेश में सरकार चलाने की महती जिम्मेदारी युवा कंधों पर दी और स्वयं कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कायम रखने के लिए , आगामी चुनावी लक्ष्यों को दृष्टि में रखते हुए संगठनात्मक कार्यों में लगे हुए हैं ।

सरकार व संगठन दोनों के पेंच कसते रहने के क्रम में एक मर्तबा सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने पुनः दोहराया है कि ,-” सपा एक लोकतान्त्रिक पार्टी है , हमारा विश्वास लोकतान्त्रिक समाजवाद में हैं । यहाँ दबी मुठ्ठी , खुली जुबान की नीति है । अनुशासन में रहते हुए अपनी बात को कहने की आज़ादी है । ” छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की तीसरी पुण्य तिथि 22जनवरी को सपा मुख्यालय लखनऊ में आयोजित श्रधांजलि सभा में अपनी भाव-भीनी श्रधांजलि देने के पश्चात् मुलायम सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा था कि ,-” डॉ लोहिया लोक भोजन , लोक भूषा और लोक भाषा को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण अंग मानते थे । जनेश्वर जी ने अपने आचरण ,विद्वता ,व्यवहार और भाषण कला से डॉ लोहिया को प्रभावित कर रखा था । समाजवाद की जीवंत मूर्ति रहे जनेश्वर मिश्र जी की हार्दिक इच्छा थी कि दिल्ली पर भी समाजवादियों का कब्ज़ा हो ।”

देश के बड़े सूबे उत्तर-प्रदेश में जनता के स्नेह-आशीर्वाद रूपी मतों से स्पष्ट-प्रचण्ड बहुमत हासिल करने के पश्चात् ही मुलायम सिंह ने दिल्ली में गैर कांग्रेसी -गैर भाजपाई सरकार के गठन के स्वरुप को आकार देने के प्रयास प्रारंभ कर दिए । आगामी लोकसभा के आम चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जहाँ एक तरफ मुलायम सिंह उत्तर-प्रदेश की समाजवादी सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को घोषणा पत्र पर तत्काल अमल करने व पूरा करने के लिए निर्देशित करते हैं वहीं पदाधिकारियों ,कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने , भ्रष्टाचार पर नजर रखने और सपा सरकार – संगठन की उपलब्धियों को प्रचारित-प्रसारित करके आम जनमानस तक पहुँचाने को भी कहते हैं । गरीबों ,पिछड़ों तथा नौजवानों को हीनता का भाव त्यागने व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वाहन जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती 24जनवरी को करते हुए मुलायम सिंह के चेहरे पर भविष्य के प्रति आशान्वित होने की स्पष्ट झलक दिखाई पड़ती है । मुलायम सिंह की भविष्य की आशाओं को साकार करने के लिए उत्तर-प्रदेश सरकार को जनता की उम्मीदों पर अपने को खरा साबित करना पड़ेगा । बसपा के शासन काल में लोग भ्रष्ट नौकरशाही -मंत्रियों से त्रस्त हो गए थे । तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती को नौकरशाहों की चौकड़ी ने अपने मोहपाश में जकड़ रखा था । उत्तर-प्रदेश की नौकरशाही अपने मोहपाश में , अपने छद्म प्रेम जाल में युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समेटने-लपेटने में पूर्णतया कामयाब न हो जाये , यह चिंता समाजवादियों को सताने लगी है । कानून व्यवस्था पर अभी भी प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका है । नौकरशाही राजनेताओं को अपने ही रंग में रंगने में माहिर होती है । चापलूसी की चाशनी में ,विनम्रता का लबादा ओढ़कर अपना वर्चस्व कायम करना नौकरशाहों की फितरत व प्रशिक्षण में शुमार है । 4-5नवम्बर ,1992 को लखनऊ के बेगम हज़रत महल पार्क में डॉ लोहिया के सिद्धांतो -विचारों पर आधारित गठित हुई समाजवादी पार्टी के स्थापना सम्मेलन में लिए गए संकल्पों का पठन ,चिंतन व अनुपालन समाजवादी पार्टी की उत्तर-प्रदेश सरकार के जिम्मेदारों को करना चाहिए । देश-प्रदेश की जनता के हित के लिए , समाजवादी विचारधारा – आन्दोलन के प्रचार-प्रसार के लिए चिंतित , उम्र के इस पड़ाव में भी प्रयासरत सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को प्रदेश सरकार के शीर्षस्थ नौकरशाही की कारगुजारियों – हीलाहवाली पूर्ण रवैये पर भी अपनी सतर्क पैनी दृष्टि डालनी चाहिए । नौकरशाही ने क्रिकेट प्रतियोगिता के बहाने अपनी शतरंजी चाल चल कर सरकार को आत्ममुग्धता में डाल दिया । डॉ लोहिया के विचारों पर बनी समाजवादी पार्टी के उत्तर-प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव – मुख्यमंत्री उत्तर-प्रदेश को स्मरण होना चाहिए कि डॉ लोहिया क्रिकेट को अंग्रेजियत – विलासिता का खेल मानते थे , और यह खेल है भी समय की भरपूर बर्बादी करने वाला , पूंजीवादी – विलासिता का वाहक । बतौर मुख्यमंत्री जिम्मेदारियों का दायरा बहुत बढ़ जाता है , व्यक्तिगत रूचि-अभिरुचि का परित्याग कर सामाजिक हितों -परिस्थितियों के अनुसार अपना प्रत्येक पल व्यतीत करना चाहिए । महोत्सव -खेल के आयोजन खूब होने चाहिए लेकिन इस महोत्सव-खेल के खेल में जनता जनार्दन की भावना से कदापि नहीं खेलना चाहिए अन्यथा आम जनता भी सत्तारूढ़ राजनैतिक दल का जमा-जमाया खेल बिगाड़ने में तनिक देर व संकोच नहीं करती है ।

निर्विवाद रूप से मुलायम सिंह यादव वर्तमान समय में डॉ लोहिया के सबसे बड़े जनाधार व संगठन वाले अनुयायी है । देश की संसद पर समाजवादियों का कब्ज़ा हो -छोटे लोहिया की इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए आगामी लोकसभा में उत्तर-प्रदेश में अधिकतम सीटों पर विजय श्री हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार को जनता से किये गए वायदों को पूरा करने व कानून व्यवस्था को पूर्णतया चुस्त-दुरुस्त करना ही होगा । एक तपे तपाये, अपने संघर्षों की बदौलत समाजवाद पर कायम रहने वाले धरतीपुत्र मुलायम सिंह के राजनैतिक-प्रशासनिक अनुभवों से शिक्षा ग्रहण करके उनके कुशल मार्गदर्शन में सरकार -संगठन दोनों को समाजवादी लोकतान्त्रिक जन कल्याणकारी राज्य की स्थापना के महती दायित्व को पूरा करने में जुट जाना चाहिए ।

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2 Comments on "समाजवादी संगठन – सत्ता के सिद्धांत,मुलायम सिंह व उत्तर प्रदेश की सरकार"

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rtyagi
Guest

इकबाल भाई,

ये तो एफडीआई पर लोकसभा में वोटिंग के समय ही एक बार फिर साबित हो गया की इन तथाकथित समाजसेवी “समाजवादी” और बहुजन हिताई “बहुजन समाज” पार्टी का चरित्र कैसा है… कितनी परवाह है इन्हें महंगाई से पिसती गरीब जनता की और अपनी जेबों की…. फिर भी ये बहुमत से जीतें तो मूर्ख कौन जनता या.. ये नेता??

आर त्यागी
बिजनौर (उ०प्र०)

इक़बाल हिंदुस्तानी
Guest

SAPA NE JIS TREH KE LOGOn KO SYMBLE DIYA AUR JIN TAUR TREEQO SE UNHONE CHUNAV JEETA US SE ACHCHHI SRKAR NA BN SKTI HAI NA CHL SKTI HAI, RHA UNKE KEHNE KA MAMLA UNKI BHI KTHNI AUR KRNI ME ANTR HAI.

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