लेखक परिचय

विमलेश बंसल 'आर्या'

विमलेश बंसल 'आर्या'

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-वसंत ॠतु पर विशेष-                                                                        

वसंत हमारा है त्योहार, वैलेंटाइन नहीं स्वीकार

1- पश्चिम का यह मकड़ जाल है,

 जिसमें डूबा भारत विशाल है।

वैदिक संस्कृति पर यह प्रहार, वैलेंटाइन नहीं स्वीकार॥

2- दो देहों का है यह घर्षण,

नहीं दिलों का है आकर्षण।

युवा वर्ग की भटकी कार, वैलेंटाइन नहीं स्वीकार ॥

3- एक दिवस की झूठी शान है,

लुटती इज़्ज़त आन बान है।

भारत माता शर्मसार, वैलेंटाइन नहीं स्वीकार॥

4- आओ सभी वसंत मनायें,

ॠषि मुनियों की शान बढ़ायें।

विमल प्रेममय हो संसार, वैलेंटाइन नहीं स्वीकार॥

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