लेखक परिचय

आवेश तिवारी

आवेश तिवारी

पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं, नक्सलवाद, विस्थापन,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण की रिपोर्टिंग में सक्रिय आवेश का जन्म 29 दिसम्बर 1972 को वाराणसी में हुआ। कला में स्नातक तथा पूर्वांचल विश्वविद्यालय व तकनीकी शिक्षा बोर्ड उत्तर प्रदेश से विद्युत अभियांत्रिकी उपाधि ग्रहण कर चुके आवेश तिवारी क़रीब डेढ़ दशक से हिन्दी पत्रकारिता और लेखन में सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद से आदिवासी बच्चों के बेचे जाने, विश्व के सर्वाधिक प्राचीन जीवाश्मों की तस्करी, प्रदेश की मायावती सरकार के मंत्रियों के भ्रष्टाचार के खुलासों के अलावा, देश के बड़े बांधों की जर्जरता पर लिखी गयी रिपोर्ट चर्चित रहीं| कई ख़बरों पर आईबीएन-७,एनडीटीवी द्वारा ख़बरों की प्रस्तुति| वर्तमान में नेटवर्क ६ के सम्पादक हैं।

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अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाने वाले गोविन्दाचार्य से हमने पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन द्वारा की गयी टिप्पणियों के सम्बंध में बातचीत की ,गोविन्दाचार्य का स्पष्ट मानना है कि ऐसी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं था, मगर कांग्रेस के मौजूदा चरित्र को लेकर उनकी अपनी आपत्तियां हैं ,एक राजनीतिज्ञ से ज्यादा विचारक और विश्लेषक के रूप में विख्यात गोविन्दाचार्य से हमने बातचीत की |आइये पूरी बातचीत सुनते हैं |

आवेश – गोविन्द जी ,आप पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन के बयान को किस तरह से देखते हैं ,और आपको क्या लगता है उनके बयान से संघ मजबूत हुआ है या उसको आम जनमानस के बीच कमजोर होना पड़ा है ?

गोविन्दाचार्य -सार्वजानिक जीवन वाले व्यक्ति को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए जैसी सुदर्शन जी ने कही |सोनिया गाँधी के सन्दर्भ में दिया गया बयान सुदर्शन जी के व्यक्तित्व और कद से मेल नहीं खाता और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संस्कृति से |सुदर्शन जी की टिप्पणी का नतीजा ये हुआ कि संघ के लाखों स्वयंसेवकों ने हिन्दू आतंकवाद जैसी विचित्र परिभाषाओं से जुड़े जिन मुद्दों पर पूरे देश में धरना दिया था वो सारे मुद्दे कपूर की तरह उड़ गए |जहाँ तक कांग्रेस का सवाल है जब १९६९ में कांग्रेस का विभाजन हुआ था तब से ही कांग्रेस का चरित्र ख़त्म हो गया था ,अब की कांग्रेस और अब के कांग्रेसियों से आप गरिमा और शालीनता की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं |

आवेश -अभी कुछ दिनों पहले राहुल गाँधी का बयान था ,जिसमे उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी संगठन करार दिया था | समकालीन भारतीय राजनीति में आप राहुल गाँधी को कहाँ देखते हैं ?और उनके ऐसे बयानों को कितना प्रासंगिक मानते हैं ?

गोविन्दाचार्य -मै न तो राहुल को और न ही उनके बयानों को महत्त्व देता हूँ |वो अभी अपरिपक्व हैं पहले उन्हें हिंदुस्तान को समझना पड़ेगा ,तब वो किसी पर कुछ टिपण्णी करने के योग्य होंगेभगवा रंग और आतंकवाद के बीच जबरिया गठजोड़ बिठाने की कोशिश शर्मनाक और हास्यास्पद है |शायद राहुल उस वक्त बच्चे रहे होंगे जब भोलानाथ पांडे और देवेन्द्र पांडे ने इन्डियन एरलाईन्स के जहाज को अगवा कर लिया था ,उन लोगों उस वक्त जहाज में सवार १३२ लोगों को जान से मारने की धमकी भी थी ,शायद कांग्रेस की नजर में ये आतंक नहीं था सो दोनों भाइयों को बाद में विधानसभा का टिकट भी दे दिया गया और दोनों जीत कर विधान सभा में पहुँच भी गए |आतंकवाद आर एस एस का चरित्र नहीं है राष्ट्र निर्माण और व्यक्तित्व निर्माण हमारा लक्ष्य है और ये जहाँ ये दोनों चीजें हैं ,वहां आतंकवाद नहीं हो सकता |

आवेश -यूपीए सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं ,आपको क्या लगता है कि कांग्रेस की उपलब्धियों के ग्राफ को ये दाग किस हद तक प्रभावित कर रहे हैं ?

गोविन्दाचार्य -कांग्रेस की उपलब्धियां! आप बताइये मुझे आप उपलब्धियां किन्हें कह रहे हैं ?

आवेश – जैसे नरेगा के रूप में ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया ………

गोविन्दाचार्य -(बात बीच में कांटते हुए )मनरेगा जैसी योजनायें समूचे देश में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी ,गरीब अपनी मजदूरी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं वहीँ योजना में शामिल एजेंसियों के अधिकारी चांदी काट रहे हैं |देखिये कांग्रेस भ्रष्टाचार की वजह से ही जीवित है ,और ये भ्रष्टाचार उस सामूहिक कुंठा का नतीजा है जो किसी भी राजनैतिक दल में परिवारवाद के बोलबाले की वजह से आता है , सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह के पास भ्रष्टाचार की इस मजबूत होती फसल को काटने की नका तो कोई युक्ति है न कोई नियत ,अगर नियत होती तो राजा के मामले में निर्णय लेने में इतना विलम्ब नहीं किया जाता ,जहाँ सत्ता प्रेम है वहां सरोकार ख़त्म हो जाते हैं ,जवाबदेही ख़त्म हो जाती है |

आवेश – सोनिया गाँधी पर पूर्व मे कई लोगों ने के जी बी के साथ सम्बंध होने के आरोप लगाये हैं ,क्वात्रोची को लेकर भी सोनिया तमाम तरह के आरोपों से जूझती रही है क्या कहेंगे आप इस बारे मे?

गोविन्दाचार्य -देखिये ,आरोप ऐसे नहीं लगाये जाते ,अगर आरोप हैं तो जिनके ऊपर आरोप हैं उन्हें जवाब देना चाहिए ,सवालों और जवाबों के दौर को इमानदार व्यक्ति स्वीकार करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा और कम से कम सोनिया जी को ऐसे सवालों का जवाब देने से नहीं भागना चाहिए |देश अब भी बोफोर्स क्वात्रोची और सोनिया कनेक्शन को जानना चाहता है ,अफ़सोस ये है कि न त यूपीए और न ही एनडीए ने इस मामले को परिणामों तक पहुँचाना चाह ,भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांग्रेस के कई अनदेखे और छुपे हुए पन्ने हैं ,अब वक्त आ गया है कि वो सबके सामने आयें |

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8 Comments on "संघ की संस्कृति के विरुद्ध बोले सुदर्शन"

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हरपाल सिंह
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प्रणाम देखिये श्रीराम तिवारी जी सच तो सच होता है वो भी राष्ट्र के प्रति तो और मै व्यक्तिगत संबंधो की बात ही नहीं करता लेकिन राष्ट्र के प्रति व्यक्ति का संबंध का तो आकलन होना ही चाहिए व्यक्ति से बढ़ा दल दल से बढ़ा देश होता है और व्यक्ति से बढ़ा से बढ़ा संगठन और संगठन से बढ़ा समाज होता है देश में १२ बारह राज्यों के प्रभारी इसाई है इसाई होना कोई पाप नहीं लेकिन जिस तरीको से वो काम कर रहे है वो ठीक नहीं है ये देश का दुर्भाग्य है की भाजपा ने सोनिया और राजीव… Read more »
श्रीराम तिवारी
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कौनसा सच ?कैसा सच ?सभी पुरषों और सभी महिलाओं केअपने सच होते हैं आप किस -किस के सच में दिलचस्पी लेना चाहेंगे ? बंद करो ये गन्दा डर्टी राजनेतिक स्व्र्थान्धता का घटिया खेल .
यदि सुदर्शन सही भी है और सोनिया जी फिर से लोकतंत्रात्मक तरीके से भरी बहुमत प्राप्त करती हैं तो उन पर आरोप लगाने वालों को चुल्लू भर पानी डूब मरने के लिए नसीब नहीं होगा ……

sunil patel
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अच्छा लगा गोविन्दाचार्य जी को सुन कर. धन्यवाद आवेश जी.
वैसे भारत की जनता के सामने सत्य लाना चाइये. जो सच्चा इतिहास जानते है आने वाले संघर्षो का मुकाबला अच्छे से कर सकते है.

डॉ. मधुसूदन
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गोविन्दाचार्य कहते हैं:-“देखिये ,आरोप ऐसे नहीं लगाये जाते ,अगर आरोप हैं तो जिनके ऊपर आरोप हैं उन्हें जवाब देना चाहिए ,सवालों और जवाबों के दौर को इमानदार व्यक्ति स्वीकार करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा और कम से कम सोनिया जी को ऐसे सवालों का जवाब देने से नहीं भागना चाहिए |देश अब भी बोफोर्स क्वात्रोची और सोनिया कनेक्शन को जानना चाहता है ,अफ़सोस ये है कि न त यूपीए और न ही एनडीए ने इस मामले को परिणामों तक पहुँचाना चाहिए ,भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांग्रेस के कई अनदेखे और छुपे हुए पन्ने हैं ,अब वक्त आ गया… Read more »
कृष्ण कुमार सोनी (रामबाबू)
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आवेश जी;
आप भी जानते हैं ओर गोविन्दच्र्य जी भी जानते हैं,कि सुदर्शन जी ने अपने जीवन में किसी पर भी निराधार आरोप नहीं लगाये.सुदर्शन जी ने जो आरोप लगाये हैं वे किन्ही सबूतों के आधार पर ही लगाये गए होंगे.

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