लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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                     टमाटर ने इधर उधर झांका और कान लगाकर ध्यान से सुनने लगा|कहीं से आवाज़ तो आ रही है किंतु किसकी है यह समझ में नहीं आ रहा था|आवाज़ इतनी धीमी  और पतली थी  कि टमाटर के कुछ पल्ले ही नहीं पड़ रहा था| उसने दोनों हाथ की हथेलियां मोड़कर  लाउड स्पीकर बनाया और कानों से लगाकर सुनने लगा| आवाज़ आ रही थी “टमाटर भैया कैसे हो,टमाटर भैया कैसे हो|”
“अरे यह तो इस सुकड़ी हरी मिर्च की आवाज़ है|”टमाटर भाई अपने साथियों के साथ टोकने में थे और मिर्च बगल में रखी एक थाली में अपनी सहेलियों के साथ मौज मस्ती के मूड में थी|
मिर्च !और मेरी बहिन,यह कैसे संभव है|कहां मैं लाल लाल ,गोल मटोल, टमाटर और कहां यह सुकट्टी मिर्च, कहां राजा भोज और कहां गंगू तेलन ,इसका मैं भाई कैसे हो सकता हूं|
“खबर दार जो मुझे भाई बोला तो|अपनी सूरत आइने में देखी है क्या?सुक्कट्टी सूखी मिर्च ,घंमंड में चूर टमाटर बोला|
“सुनो तो भैया, मैं सचमुच तुम्हारी बहिन हूं ,छोटी बहि…………………”
“चुप रह यदि ज्यादा बोली तो जवान खींच लूंगा| मुझे गोल मटोल लाल लाल देखकर भाई बनाने लगी”| टमाटर फिर गुर्राया|
भैया मैं भी तो हरी हरी सुंदर सलौनी हूं|थोड़ी दुबली हूं तो क्या हुआ,दुबला होना तो अच्छी बात है|डाक्टर भी तो तुम जैसे गोल मटोलों को सलीके से रहने की सलाह देते हैं ताकि दुबले रहो और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से दूर रहो|”मिर्च इठलाकर  बोली|

“अब तू चुप भी रहेगी या आऊं कूदकर ,कुचल के रख दूंगा|मेरे गुण भी जानती है,जो मुझे अपना भाई समझने की जुर्रत कर रही है|मैं गुणों से भरी ऐसी खदान हूं जो जहां से शरीर के लिये आवश्यक ढेर सारे खनिज पदार्थ निकाले जा सकते हैं|लोग सलाद के रूप में थाली में सजाकर खाने में अपने को गर्वान्वित महसूस करते हैं|मुझमें विटामिन सी,लाइकोपिन,दूसरे विटामिन्स और पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाये जातॆ हैं|मेरे उपयोग से इंसानों के कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है|और तो और वज़न को नियमित करने में भी मैं भरपूर सहायक हूं| मजे की बात तो यह है कि भूनने के बाद भी मेरे विटामिन्स नष्ट नहीं होते| इतने सारे गुण वाला महान मुझ जैसा कोई तेरा भाई कैसे हो सकता है|”
” वाह वाह टमाटर भाई,अपने ही यशोगान गाते रहोगे या मेरी भी सुनोगे|”मिर्ची को अब क्रोध आ गया था |
“क्या है तेरे पास,बोल तीखी चटपटी मिर्च, जीभ  को छू भी जाये तो जीभ ही जल जाये,सुकड़ी कहीं की,न देखने की न दिखाने की|”
”  ए भाई ज्यादा बकबक मत कर ,मैं तुम से किस बात में कम हूं देख मुझ में अमीनो एसिड है,एस्कार्बिक एसिड है,फोलिक एसिडहै,ग्लीसरिक ऎसिड है,सक्सीनिक एसिड है है,शिकिभिक एसिड है,मैलिक एसिड है,…
“ए ए चुप चुप क्या क्या बोले जा रही है?”टमाटर ने बीच में ही टोक दिया|
” मुझमें इतने गुण हैं कि तू सुन भी न पायेगा” मिर्ची आवेश में आ गई थी|
“और सुन फोलिक एसिड में तो इतने गुण हैं कि गर्भस्थ शिशु के अंग निर्माण में सहायक होने के कारण ऐसी महिलाओं को खास तौर पर मेरा सेवन करने की सलाह दी जाती है| और सुन डाईस्टार, क्रिसोकेप्सीन, कोलेस्ट्राल ,..”मिर्ची कहे जा रही थी|
” बस बहुत हो गया ये सब बकवास है,मुझे यह मालूम है  तू जलन पैदा करने वाली कड़वी कोई तीखी वस्तु है बस|”मैं इंसानों के बहुत काम की चीज हूं |यदि पेट में कीड़े हों तो काली मिर्च के साथ मेरा सेवन कीड़ों का नाश कर देता है| और  …
.”बस बस मेरा भी तो घर घर उपयोग होता है,हेमोग्लोबिन कम हो तो मेरा प्रयोग रामबाण का काम करता है|मेरा उपयोग से खाने को जल्दी हज़म करने में मदद मिलती है …मिर्ची आगे  कुछ और कहने जा रही थी कि घर की मालकिन ने टामाटर की टोकनी उठाई और किचिन में ले गई|टमाटर मुस्कराता हुआ जा रहा था मानों कह रहा हो देखा मेरा उपयोग कितने काम की चीज हूं|
मालकिन ने टोकनी के टमाटर उठाकर मिक्सी में डाल दिये और चटनी बना दी|
थोड़ी देर बाद भीतर से मकान के स्वामी की बड़ी तेज आवाज़ आई”ये चटनी है  या घास, इसे फेको बाहर ,इसमें मिर्ची बिल्कुल नहीं है|”घर मालकिन घबऱा गई हड़बड़ी में आई और मिर्ची की थाली उठाकर आठ दस मिर्ची मिक्सी में चटनी के साथ डालकर मिक्सी चला दी|
“कहो भैया क्या हाल है”मिर्च व्यंग्यात्मक लहज़े में बोली|
‘”बहिन मुझे माफ कर दो,मुझे तुम्हारा महत्व समझ में आ गया है| तुम्हारे बिना तो मेरा तो अस्तित्व ही खतरे में पड़ने वाला था,मुझे तो फेक ही देते|मेरी प्यारी बहिन मेरे गुण तो मुल्यवान हैं ही पर तुम भी गुणों की खान हो मैं समझ गया हूं|”टमाटर शर्मसार हो रहा था|
” ठीक कह रह रहे हो भैया दुनियां में प्रत्येक वस्तु का महत्व होता है और सबको सम्मान मिलना चाहिये|”इतना कहकर मिर्ची टमाटर  भैया के गले लग गई| दोनों मिक्सी में पिसते हुये हँस रहे थे|

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2 Comments on "सुकुड़ी मिर्च और लाल टमाटर‌"

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव
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प्रभुदयाल

धन्यवाद प्रभुदयाल

बीनू भटनगर
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बीनू भटनगर

इतने भोलेपन से कई संदेश  एक साथ 

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