लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर ‘‘शादाब’’

बच्चा औरत की कोख में पूरे 9 महीने पलता है हजारो तकलीफे उठाने के बाद जब बच्चा औरत की गोद में आता है तो वो पिछले सारे दुख भूल जाती है और बच्चा भी जब पहली बार बोलना सीखता है तो उस के मुॅह से पहला शब्द सिर्फ और सिर्फ मां ही निकलता है। दुनिया में आज तक मां से बड़ा और पाक रिश्ता कोई और दूसरा नही है। पर अब कुछ लोगो ने इस पाक रिश्ते और इस पाक नाम को बाकायदा व्यापार से जोड़कर इसे एक धंधे का रूप दे दिया है। इस रिश्ते की अजमत गिरने न पाये इस के लिये आज देश के कुछ बुद्विजीवी, समाजसेवी, धार्मिक लोगो के अलावा देश के आम लोगो के बीच एक लम्बी बहस जारी है कि इस मां के व्यवसाय को कैसे रोका या फिर बंद किया जाये। पिछले दिनो दारूल उलूम देवबंद ने एक सवाल के सवाब में सेरोगेसी यानी किराये की कोख के तरीके और इसे अपने को पूरी तरह हराम बताया था। हालाकि भारत में कानूनी तौर पर 2002 में ही सेरोगेसी को जायज करार दे दिया गया था पर सवाल ये उठता है कि बात हराम या हलाल की नही बात एक मां की है आखिर क्यो एक औरत अपनी कोख किसी गैर मर्द को किराये पर देने, उस के भ्रूण को नौ महीने अपने बदन में क्यो किस मजबूरी में रखने को मजबूर हो रही है। पैसे की तंगी, परिवार का उत्पीड़न, आधुनिक समाज की चकाचौध में जीने की चाह या फिर सिर्फ शौक। ये कई सवाल में समझता हॅू आज इस विषय पर करने जरूरी है।

हमारे समाज में आज भी जब घर परिवार वालो को मालुम होता है कि परिवार में एक नन्हा मेहमान आने वाला है है तो पूरे परिवार में एकदम खुशी का माहौल बन जाता है। जहां तक सेरोगेसी यानी किराए की कोख का सवाल है इसे किसी भी तरह से भारतीय नारी और हमारी सामाजिक परम्पराओ के हित में नही कहा जा सकता, क्यो कि ये तो एक तरह से शरीर बेचना हो गया वही अगर बात भारतीय संस्कृति की करे तो ये पूरी तरह से हमारी भारतीय संस्कृति का अपमान है। इस सब के बावजूद सेरोगेसी को भारतीय कानून ने जायज करार दे दिया है। सेरोगेसी यानी किराये की कोख का धंधा अभी तक लोग छुपते छुपाते कर रहे है पर वो दिन दूर नही जब ये बीमारी पूरी तरह से देश में फैल जायेगी और लोग सामाज और लोकलाज के डर के बगैर ये धंधा खुले आम करेगे। सेरोगेसी यानी किराये की कोख के जो आंकड़े आज भारत में निकलकर आ रहे है वो हैरत में डालने के साथ ही चिंता का विषय भी है क्यो कि कुछ महिला व पुरूष दलाल आज पूरी तरह से इस धंधे में उतर कर पूरी तरह इस मे रच बस गये है। गरीब महिलाओ को बहलाने फुसलाने के साथ ही इन दलालो ने देश के कुछ नारी संरक्षण केंद्रो व नारी निकेतनो और गांव कस्बो और आर्थिक तंगी में जीवन जी रही महिलाओ को रूपये का लालच देकर ये इन्हें अपने जाल में फांस कर सेरोगेसी यानी किराये की कोख के लिये राजी कर लेते है।

आज सेरोगेसी यानी किराये की कोख के मामलो में अधिकतर ये देखा जा रहा है कि कोख को किराए पर देने वाली ज्यादातर महिलाए परिवार की आर्थिक तंगी, बेरोजगारी के कारण ही अपनी कोख का सौदा करती है, ऐसी महिलाओ के पति या तो पूरी तरह निकम्मे होते है या फिर वो इतना नही कमा पाते के घर का खर्च पूरी तरह से चल जायें। कुछ ऐसी महिलाए भी अपनी कोख किराए पर दे रही है जो अपने घर परिवार की हालत बदलना चाहती है। अपने महंगे शौक पूरे करना चाहती है। पर पूरी तरह से सेरोगेसी यानी किराये की कोख कानून की जानकरी न होने के कारण कोख किराए पर देने वाली महिलाओ के हाथ कुछ नही लग रहा है आज इस धंधे में घुसे दलाल मजे कर रहे है। गरीब महिलाओ के बदन में अंजान व्यक्ति का भ्रूर्ण डालवा कर ये दलाल बेफिक्र हो जाते है सेरोगेसी यानी किराये की कोख देने वाली महिला के स्वास्थ्य, उस की दवाईयों, खानपान, पोष्टिक आहार के लिये सेरोगेसी यानी किराये की कोख खरीदने वाले अमीर भारतीय या फिर विदेषी लोगो से ये लोग भरपूर पैसा लेने के बावजूद इन दलालो द्वारा सेरोगेसी यानी किराये की कोख देने वाली महिला की कोई देख रेख नही की जाती वही समय समय पर एक स्त्री की भावनाओ की भी अवहेलना की जाती है पूरे नौ महीने जैसे तैसे सेरोगेसी यानी किराये की कोख देने वाली महिला आर्थिक तंगी में बच्चे को जन्म देती है जिसे समय पूरा होने पर ये दलाल किसी महाजन की तरह समय पर फसल काटने के लिये उपस्थित हो जाते है। और थोडा बहुत पैसा देकर एक मां से उस के जिगर का टुक्डा सेरोगेसी यानी किराये की कोख के नाम पर ये दलाल कहा दे आते है खुद उन को भी पता नही होता। किराए की कोख उपलब्ध कराने वाली महिला अगर चोरी-छुपे यह काम कर रही है तो उस का शोषण होना और भी निश्चित है। ऐसी महिलाओ को उन की कोख के लिये बहुत ही कम पैसे दिये जाते है। इलाज, खानपान, पौष्टिक आहार की बात तो भूल जाईये। कई बार तो सेरोगेसी यानी किराये की कोख देनी वाली महिलाओ से बहला फुसला कर उन से वो बच्चा भी ले लिया जाता है। और बदले में उन्हे कुछ भी नही मिलता सेरोगेसी यानी किराये की कोख से अपने सपनो को रंगीन करने वाली ऐसी महिलाओ का तीन तरह से शोषण होता है पहला भावनात्मक, दूसरा शारीरिक, और तीसरा आर्थिेक। ऐसे तमाम मामलो में अब तक ये देखा गया है कि ऐसे मामलो में शोषण की शिकार ज्यादातर महिलाए कम पढी लिखी और सेरोगेसी यानी किराये की कोख के नियमो से वाकिफ नही होती है। परिवार की आर्थिक स्थिति के हाथो मजबूर महिलाए आज ज्यादा तादात में सेरोगेसी यानी किराये की कोख के धंधे में लगी हुई है क्यो कि आर्थिक स्थिति से मजबूत शायद ही कोई महिला सेरोगेसी यानी किराये की कोख के लिये तैयार हो

हमारी सरकार ने सेरोगेसी यानी किराये की कोख का कानून तो 2002 में पास कर दिया पर इस की जानकारी नियम कानून अभी तक पर्द के पीछे छुपे है। जिस कारण गरीब अनपढ महिलाओ का सेरोगेसी यानी किराये की कोख के नाम पर आज कुछ दलाल शोषण कर रहे है। किसी भी सेरोगेसी यानी किराये की कोख देने वाली महिला के लिये यदि चिकित्सीय पंजीकरण व डाक्टर की वैधानिक सहमति अथवा अन्य कानूनी औपचारिकताएं अनिवार्य कर दी जाये, तो इस से सेरोगेसी यानी किराये की कोख दे रही महिला का एक ओर जहॉ दलालो द्वारा शोषण कम हो जायेगा वही वो महिला कानूनी रूप से मजबूत होने के साथ ही वो जिस मजबूरी वंष अपनी कोख किराए पर दे रही है उसे उस के लिये पर्याप्त पैसा भी मिलेगा।

हमे इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिये आगे आना होगा और लोगो को समझाना होगा कि इस घिनौने सेरोगेसी यानी किराये की कोख के धंधे से तो बेहतर है कि बच्चे पाने की चाह रखने ऐसे तमाम लोग किसी अनाथ आश्रम या बेसहारा बच्चे या बच्ची को गोद ले ले। न जाने क्या आज लोग सेरोगेसी यानी किराये की कोख को पसंद करने लगे है। शायद इस की एक वजह ये भी है कि गोद लेने से बच्चे में गुण बाप के नही आ पाते जब कि सेरोगेसी यानी किराये की कोख से पैदा बच्चा थोडा बहुत और कभी कभी पूरी तरह बाप शक्ल सूरत और सीरत लेकर पैदा होता है। बस ये ही कारण है कि लोग सेरोगेसी यानी किराये की कोख को पसंद करने लगे है। आज देश में जिस रफ्तार से सेरोगेसी यानी किराये की कोख का चलन चल निकला है उस से यकीनन हमारी सामाजिक, धार्मिक, और भारतीय संस्कृति को तो नुकसान होगा ही साथ ही ये पैसा कही मां की कोख को मां के लिये कलंक न बना दे।

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1 Comment on "पैसा, मां की कोख, मां के लिये कलंक न बना दे!"

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AKASH MISHRA
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क्या कहॅू और कहा से शुरू करू में समझ ही नही आ रहा। सब से पहले इस नये विषय को इतने सुन्दर ढेग से पेश करने के लिये आप को बहुत बहुत बधाई। आप मां की कोख का कुछ लोगो ने धंधा शुरू कर दिया पढकर मेरा पूरा बदन बेजान सा हो गया। मां और उस का बच्चा यदि दुनिया में व्यापार में शामिल हो जायेगा तो फिर बचेगा क्या। लगता है दुनिया का अन्त आ गया है। हमेशा की तरह आप को इस लेख के लिये भी बधाई।

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