धन लेकर अराजकता फैलाने वाले अलगाववादी

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सरकार की नीतियों अथवा अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन का अधिकार संविधान ने देश के हर एक नागरिक को दिया है। देशभर में आए दिन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कभी-कभी लाठीचार्ज किया जाता है या आसूं गैस अथवा तेज पानी की बौछारें छोड़कर उग्र होती भीड़ को काबू में लिया जाता है। लेकिन घाटी में प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार सेना और सुरक्षा बलों को मिला हुआ है।

कश्मीरः ये आग कब बुझेगी ?

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यह वक्त ही है कि कश्मीर को ठीक कर देने और इतिहास की गलतियों के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराने वाले आज सत्ता में हैं। प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार है, पर हालात बेकाबू हैं। समय का चक्र घूम चुका है। “जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है” का नारा लगाती भाजपा देश की केंद्रीय सत्ता में काबिज हो चुकी है। प्रदेश में भी वह लगभग बराबर की पार्टनर है। लेकिन कांग्रेस कहां है?इतिहास की इस करवट में कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं भी नदारद हैं। फारूख अब्दुल्ला को ये पत्थरबाज देशभक्त दिख रहे हैं। आखिर इस देश की राजनीति इतनी बेबस और लाचार क्यों है।

कश्मीर में सरकार आपकी पर ‘राज’ किसका?

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घाटी के गुमराह नौजवानों को भी यह समझाने की जरूरत है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। पाकिस्तान और आईएस के झंडे दिखा रही ताकतों को जानना होगा कि भारत के संयम को उसकी कमजोरी न समझा जाए। इतनी लंबी जंग लड़कर पाकिस्तान को हासिल क्या हुआ है, उसे भी सोचना चाहिए। दुनिया बदल रही है। लड़ाई बदल रही है। कश्मीर घाटी में लोकतंत्र की विरोधी शक्तियां भी पराभूत होगीं, इसमें दो राय नहीं।

कश्मीर में पैलेट गन क्यों नही…

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जबकि यह सर्वविदित ही है कि वर्षो से कश्मीर घाटी में अलगाववादियों व आतंकवादियों द्वारा प्रति लड़के/युवक को 500 से 1500 रुपये तक देकर सुरक्षाबलों पर हमले करवायें जाते आ रहे है। परिणामस्वरूप अनेक सुरक्षाकर्मी मारे भी गये और साथ ही सरकारी संपत्तियों की भी भारी क्षति हुई है। पिछले कुछ वर्षों के अतिरिक्त भी जुलाई 2016 में आतंकी बुरहानवानी के मारे जाने के बाद इन पत्थरबाजों की टोलियों ने कई माह तक विशेषतौर पर दक्षिण कश्मीर में सामान्य जनजीवन को ही बंधक बना दिया था।

हिन्दुओं को मिले तीन विकल्प-इस्लाम, मृत्यु, कश्मीर छोड़ो

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‘भारत में मूत्र्ति पूजा’ का लेखक हमें बताता है-‘‘मुसलमान फकीर हिंदू वेष में मंदिरों में रहकर वहां की आंतरिक दशा का अध्ययन करते थे और उसकी सूचना अपने प्रचारकों तथा मुस्लिम शासकों को देते रहते थे। जो उस समय उनसे पूरा लाभ उठाते थे। इब्नबतूता का कहना है कि चंदापुर के निकट एक मंदिर में उसकी भेंट एक ऐसे जोगी से हुई जो वास्तव में एक मुसलमान सूफी था और केवल संकेत से बातचीत करता था। फारसी का प्रसिद्घ कवि शेख सादी सोमनाथ के मंदिर में कुछ समय हिंदू साधु बनकर रह गया था।

जब कश्मीर के राजा जशरथ ने बढ़ाया भारत का ‘यश’ रथ

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राकेश कुमार आर्य संसार एक सागर है संसार एक सागर है, जिसमें अनंत लहरें उठती रहती हैं। ये लहरें कितने ही लोगों के लिए काल बन जाती हैं, तो कुछ ऐसे शूरवीर भी होते हैं जो इन लहरों से ही खेलते हैं और खेलते-खेलते लहरों को अपनी स्वर लहरियों पर नचाने भी लगते हैं। ऐसा संयोग इतिहास… Read more »

पं. बंगाल, ममता के राज में दम तोड़ती अभि‍व्यक्ति

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी पश्चिम बंगाल की पहचान भारत वर्ष में अपनी स्वतंत्र अभि‍व्यक्ति के लिए सदैव से रही है। देश का स्वतंत्रता आंदोलन हो या लोकतंत्र एवं सुधारवादी आन्दोलनों से जुड़ी कोई घटना एवं चर्चा, हमेशा से बंगाली जनता इसमें आगे रहती आई है। किंतु वर्तमान परिदृश्य देखकर लग रहा है कि अब बंगाल का… Read more »

कश्मीर भारत का मूल राज्य

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डा.राधेश्याम द्विवेदी हिन्दू मूल निवासी:-कश्मीर के मूल निवासी सारे हिन्दू थे। कश्मीरी पंडितो की संस्कृति 5000 साल पुरानी है और वे ही कश्मीर के मूल निवासी हैं। प्राचीनकाल से ही कश्मीर महर्षि कश्यप के नाम पर हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है। ब्रह्म से ब्रह्मा, ब्रह्मा से मरीचि, मरीचि से कश्यप ऋषि ही… Read more »

कश्मीर पर अब खुलेगा शिवजी का त्रिनेत्र

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक कश्मीर के घायल नौजवानों के प्रति हमदर्दी जताने के लिए केंद्र सरकार ने क्या-क्या नहीं किया? प्रधानमंत्री अौर गृह मंत्री ने उन्हें ‘हमारे बच्चे’ तक कहा। उनके कंधों पर मधुर बयानों का मरहम भी लगाया। खुद गृहमंत्री कश्मीर भी गए। बाद में सभी राजनीतिक दलों का प्रतिनिधिमंडल भी गया। घायल नौजवानों के… Read more »

कश्मीरः अब पत्थरों के बदले गोलियां

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सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल कश्मीर हो आया। नतीजा क्या निकला? उल्टा ही हुआ! गृहमंत्री राजनाथसिंह ने पूरी कोशिश कर ली। न जाकर भी देखा और जाकर भी देख लिया। पहले खुद जाकर देखा, फिर सबको ले जाकर देख लिया। हुर्रियतवालों के हाथों अपनी उपेक्षा भी देख ली। शरद यादव, सीताराम येचूरी, डी. राजा वगैरह को जीलानी… Read more »