स्वार्थ अप्रतिम, मूल्यवान, अनिन्दनीय

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हृदयनारायण दीक्षित अपना सुख सबकी कामना है। अपनों का सुख इसी अपने का हिस्सा है। तुलसीदास की आत्मानुभूति प्रगाढ़ थी। उन्होंने इसी अपनेपन के लिए एक प्रीतिकर शब्द दिया-‘स्वान्तः सुखाय’। रामकथा उन्होंने ‘स्वान्तः सुखाय’ ही गायी। सभी प्राणी अपने सुख के लिए ही कर्म करते हैं। दूसरों के सुख की बात करने वाले राजनीति करते… Read more »