मेरी ( आम आदमी की ) उलझनें

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-आलोक कुमार-   नए साल की शुरुआत के साथ मैं, एक आम आदमी, अपनी उलझनों के जवाब खोज रहा हूं। बारह महीनों बाद यह साल (2014) भी बीत ही जाएगा । सब नए साल के नए संकल्प ले रहे हैं लेकिन मैं अपने आप को घोर उदासी में घिरा पाता हूं। आस्था का संकट तो… Read more »