मेरी बेटी

Posted On by & filed under कविता, साहित्‍य

खुशबू है मेरी आंगन की जो सारे घर को महकाती है। लोरी है मेरी दामन की जो खुद को और मुझे सुलाती है। कोयल है एक डाली की जो सारे बाग को चहकाती है कली है एक फुल की जो बेरंग दुनिया में रंग भर जाती है। एक बुंद है सागर की जो मेरी प्यास… Read more »