मेरे होने, न होने के बीच का अवकाश है तुम्हारे लिये …

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मेरे होने, न होने के बीच का अवकाश है तुम्हारे लिये … कितना कुछ घुमड़ रहा है मेरे अंदर और बाहर से मेरे अंदर तक फैलता कोलाहल किसी धुएँ की तरह प्रदूषित कर देता है मेरे मन को…   मैं हरपल – मेरे होने के साथ जीना चाहता हूँ मगर मेरे होने, न होने के… Read more »