मैं भी तो सूर्यपुत्री तापी हूं…

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-रामकिशोर पंवार ‘रोंढावाला’- आदिकाल से लेकर अंत तक भारत एवं भारतीय संस्कृति में नदी -नारी दोनों को ही जीवनदायिनी के रूप के रूप में पूजा जाता रहेगा। जहां एक ओर नारी जन्म देती है तो वहीं दूसरी ओर नदी मोक्ष प्रदान करती है। एक सच तो यह भी है कि प्राचीन इतिहास की अनेक सभ्यताओं… Read more »