मैं

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मैं चुप रहता हूँ कुछ भी काम नहीं करता सिर्फ सपने बुनता हूँ अकेला दौड़ता रहता हूँ धूल भरी मेड़ों पर ।   मैं खो जाता हूँ देर तक कविताओं में और डूबता-उबरता हूँ उन कविताओं के स्पंदन में ।   मैं नहीं चाहता हूँ विष बोना आदमियत की मिट्टी में ।   मैं यही… Read more »