मैकाले-मैक्समूलर के सामने रावण-महिषासुर भी बौने

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मनोज ज्वाला भारत पर अपना औपनिवेशिक प्रभुत्व स्थापित कर लेने के बाद ब्रिटिश हूक्मरानों-चिंतकों व यूरोपियन दार्शनिकों ने भारत को नजदीक से देखने-समझने के बाद यह रहस्य जान लिया था कि इस राष्ट्र की शाश्वतता , इसकी संजीवनी शक्ति अर्थात संस्कृति में सन्निहित है और इसकी संस्कृति का संवाहक है यहां का विपुल साहित्य और… Read more »

मैकाले -मैक्समूलर के चिन्तन से भारतीय राष्ट्रीयता का क्षरण

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मनोज ज्वाला भारत पर अपना औपनिवेशिक प्रभुत्व स्थापित कर लेने के बाद ब्रिटिश हूक्मरानों-चिंतकों व यूरोपियन दार्शनिकों ने भारत को नजदीक से देखने-समझने के बाद यह रहस्य जान लिया था कि इस राष्ट्र की शाश्वतता , इसकी संजीवनी शक्ति अर्थात संस्कृति में सन्निहित है और इसकी संस्कृति का संवाहक है यहां का विपुल साहित्य और… Read more »