रावण-दहन से ज्यादा जरुरी है मैकाले-दहन

Posted On by & filed under समाज

मालूम हो कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी के माध्यम से भारत पर अपना औपनिवेशिक शासन-साम्राज्य कायम कर लेने के पश्चात अंग्रेजों ने पहले तो अपने साम्राज्यवादी उपनिवेशवाद का औचित्य सिद्ध करने के लिए अपने तथाकथित विद्वानों-भाषाविदों के हाथों प्राचीन भारतीय शास्त्रों-ग्रन्थों को अपनी सुविधा-योजनानुसार अनुवाद करा कर उनमें तदनुसार तथ्यों का प्रक्षेपण कराया और फिर बाद में भारतीय शिक्षण-पद्धति

मैकाले और हमारे भ्रम

Posted On by & filed under समाज

( डा. रवीन्द्र  अग्निहोत्री )  लार्ड मैकाले की आत्मा अगर कहीं से देख पाती होगी तो यह देखकर अवश्य ही संतोष का अनुभव करती होगी कि उसे उसके अपने देश ने भले ही  भुला दिया हो, कोई वहां उसका नाम भी न लेता हो ,  पर इंडिया नाम की  जिस असभ्य , गंवार , जंगली… Read more »