जिन्होंने समाज, साहित्य और राष्ट्र को एक नई दिशा दी

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-प्रमोद भार्गव- -संदर्भः मैथिलीशरण गुप्त के जन्मदिन 3 अगस्त के लिए विशेष- मैथिलीशरण गुप्त का राष्ट्रीय प्रदेय- मैथिलिशरण गुप्त का समाज,साहित्य और राष्ट्र के लिए प्रदेय बेहद महत्वपूर्ण होने के साथ युगानुरूप है। वे किसी वैचारिक खूंटे से नहीं बंधे थे। यही कारण रहा कि उनकी रचनाएं संकीर्णता, रूढ़िवादिता और मतवादिता से सर्वथा मुक्त रहीं।… Read more »