मोदी जी नियरे निन्दक

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डॉ. मधुसूदन(एक)लेखनी वीरों को अवसर ही अवसर: जबान फडफडाकर या लेखनी घिसड घिसड कर आलोचना करने में क्या जाता है? आलोचना आसान है। आराम कुर्सी में मेंढक (प्रेक्षक)बन बैठे रहो;और टर्राते रहो। अपने व्यवसाय में डूबे पैसा कमाने से जिन्हें फुरसत नहीं, वे दूर से मज़ा देखकर जबान की चर्पट पंजरी चलाते रहते हैं,और मोदी… Read more »