मोदी लहर में सब साफ

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भा.ज.पा. को शुरू से ही बादल विरोधी रुझान दिख रहा था। फिर भी उसने साथ नहीं छोड़ा। इसके दो कारण हैं। एक तो दोनों का साथ पुराना है। दूसरा भा.ज.पा. वहां शहरी हिन्दुओं की पार्टी है, तो अकाली ग्रामीण सिखों की। दोनों का मेल वहां सामाजिक सद्भाव का समीकरण बनाता है। इसे बचाने के लिए निश्चित हार का खतरा उठाकर भी भा.ज.पा. अकालियों के संग रही।

क्षेत्रीय दलों के राष्ट्रीय विकल्प पर फिरा पानी

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-प्रमोद भार्गव- क्षेत्रीय दलों के राष्ट्रीय विकल्प बनने के मंसूबों पर चुनाव परिणामों ने पानी फेर दिया है। तीसरे र्मोचे के सूत्रधार रहे वामपंथी दल भी सकते में हैं। मुलायम, लालू, मायावती, नीतीश कुमार, करूणानिधी और अजीत सिंह जैसे दिग्गज मुंह लटकाए फिरने की स्थिति में आ गए हैं। अलबत्ता मोदी लहर के बावजूद ममता… Read more »