आओ! मोदी के नये भारत की अगवानी करें

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‘मन की बात’ करने वाले मोदीजी देश के लिये ही सोचते हैं, देश के लिये ही करते हैं, देश के लिये ही जीते हैं। जबकि अब तक की राजनीति में सब कोई अपने लिये और अपने स्वार्थों के लिये जी रहे थे। सबसे बड़ी पार्टी की कुछ ऐसी ही गलत नीतियां रही है कि आज उसका सफाया हो चुका है। भारत को कांग्रेस मुक्त करने के संकल्प को पूरा करने में मोदी को ज्यादा वक्त नहीं लगा। भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की जगह ले ली है। बात कांग्रेस की ही नहीं, बात राष्ट्रीय चरित्र को धुंधलाने की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने बिहार में चुनावी हार को जीत में बदलने में कितना समय लिया? देश की कुल आबादी के करीब सत्तर फीसदी पर भाजपा का शासन हो चुका है।

आई आई ए!

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आई फ ॉर आई यानी इण्डिया फ ॉर इजराइल एवं इजराइल फ ॉर इण्डिया तथा इण्डिया विद इजराइल एवं इजराइल विद इण्डिया की आत्मीयता के साथ इजराइल की दोस्ती को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में गत सप्ताह इजराइल पहुंचे नरेन्द्र मोदी ने आई फ ॉर आई के जरिये… Read more »

मोदी ने मुसलमानों का बोझ उतार दिया!

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पश्चिम एशिया की एक संकरी पट्टी में स्थित इस्राइल की स्थापना को अगले साल 70 वर्ष पूरे होंगे। ब्रिटिश गुलामी से मुक्त होकर विखंडीत रूप में ही सही लेकिन स्वतंत्र होकर भारत को इस वर्ष अगस्त में 70 साल पूरे होंगे। यानि ये एक के बाद एक जन्मे हुए भाई है। लेकिन इस दौरान उनकी ओर इस्राइल नामक देश की… Read more »

मोदी की ऐतिहासिक इजराइल-यात्रा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह इजराइल-यात्रा ऐतिहासिक है। ऐतिहासिक इसलिए कि जिस देश के साथ पिछले 70 साल से हमारे खुले और गोपनीय संबंध रहे हैं, वहां जाने की हिम्मत पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने की है तो वह मोदी ने की है। मोदी के पहले पी.वी. नरसिंहराव ने भी इजराइल-यात्रा का विचार किया था… Read more »

मोदीः जनविश्वास पर खरा उतरने की चुनौती

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-संजय द्विवेदी जिस दौर में राजनीति और राजनेताओं के प्रति अनास्था अपने चरम पर हो, उसमें नरेंद्र मोदी का उदय हमें आश्वस्त करता है। नोटबंदी, कैसलेश जैसी तमाम नादानियों के बाद भी नरेंद्र मोदी लोगों के दुलारे बने हुए हैं, तो यह मामला गंभीर हो जाता है। आखिर वे क्या कारण हैं जिसके चलते नरेंद्र… Read more »

कश्मीर का दर्द, देश का मर्ज और मोदी

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इधर भारत के नेतृत्व ने कश्मीर में ‘नागों’ को दूध पिलाना आरंभ कर दिया। गांधी की अहिंसा और भाईचारे की बातों के संदेश के साथ कश्मीर को आज तक अरबों रूपये के कितने ही पैकेज दिये गये पर वे सारे के सारे पैकेज इस बात को सत्य सिद्घ नहीं कर पाये कि ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।’ वहां मजहब ही आपस में बैर रखना सिखाता रहा और हमारे ही लोगों को अपनी ही भूमि से अपने ही घरबार छोडक़र भागने के लिए विवश करता रहा। इधर कांग्रेस आतंकवादियों के साथ ऐसा व्यवहार करती रही जैसे कि वे बहुत बड़े देशभक्त हैं और उनकी सुरक्षा पर या उनकी सुख-सुविधा पर धन व्यय करना हमारा राष्ट्रीय कत्र्तव्य है।

व्यग्र न हों – मोदी पर विश्वास रखें

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जैसा कि इस आलेख के प्रथम पक्ष में ही मैंने चाणक्य का उद्धरण देकर बताया कि हमें स्वयं को साधकर सटीक समय पर अपना सर्वोत्तम करना होगा. आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यही है. और आज के समय की सबसे दुखद परिस्थिति यही है कि हमारी पीढ़ी कुछ अधिक व्यग्र है, वह कुछ अधिक ही हावी होनें के प्रयास में भी रहती है किंतु इस क्रम में आगे बढ़ते हुए वह स्वनियंत्रण को ही खो बैठती है जो इस समय की मूल ही नहीं अपितु परम आवश्यक आवश्यता रहती है. हम देख रहें हैं कि पाकिस्तान द्वारा हमारें सैनिकों के साथ पाशविक आचरण के बाद मीडिया पर और विशेषतः सोशल मीडिया द्वारा नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जिस तरह का बदला लेनें का मानसिक दबाव बना दिया गया है. लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित किसी भी सरकार के लिए ऐसा जनदबाव खतरनाक साबित हो सकता है, वो तो अच्छा है कि मोदी सरकार और उसके विभिन्न भाग व अंग इस जनदबाव के समक्ष भी अपनें विवेक व दायित्वबोध को यथा स्थान, यथा समय व यथा संतुलन समायोजित किये हुए है.

मोदी का पौधा रोपण है योगी

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नरेंद्र दामोदर दास मोदी ये नाम आज कौन नहीं जानता देश दुनिया सब हैरान हैं विपक्ष परेशान है ऐसे में यूपी में योगी की ताज पोशी कोई एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि एक सोचा समझा कदम जान पड़ता है या यूँ कहें की योगी मोदी का पौधा रोपण है तो भी शायद गलत नहीं होगा इस साहस… Read more »

अवमानना के लिए विशेषाधिकार का प्रयोग क्यूँ नहीं ?

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का कितना बड़ामखौल है इस देश में कि वर्तमान प्रधानमंत्री के लिये अभद्रशब्दों और गालियों का प्रयोग अधिकतर विपक्ष के नेता और छुटभइये कर सकते हैं परंतु वर्तमान प्रधानमंत्री किसी पूर्व प्रधानमंत्री को रेनकोट पहनकर स्नान करने की बात नहीं कह सकता। वर्तमान सरकार के नोटबंदी के निर्णय को पूर्व प्रधानमंत्री संगठित लूट और कानूनी लूट की संज्ञा तो दे सकता है परंतु पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुए अरबों के बहुचर्चित घोटालों जिनके लिये सर्वोच्च न्यायालय तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था, की ओर इशारा तक वर्तमान प्रधानमंत्री नहीं कर सकता।

कैसी होगी ट्रंप और मोदी की जुगलबंदी?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छा संवाद कायम हो गया है। वे दोनों दो बार फोन पर बात कर चुके हैं और अपने चुनाव-अभियान के दौरान हजारों प्रवासियों भारतीयों के बीच ट्रंप कह चुके हैं कि ‘आई लव हिंदू एंड इंडिया’। इसके अलावा… Read more »