मोहब्बत और रोटी

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पियूष द्विवेदी ‘भारत’ एक थी मोहब्बत, और थी एक रोटी! फैसला करो कि कौन बड़ी कौन छोटी?   मोहब्बत है बोली, हूं मै खूबसूरत! मेरी इस जहाँ में, है सबको ज़रूरत!   मेरी इक अदा पर, लग जाती कतारें! मै हँस जो अगर दूं, आ जाती बहारें!   मेरी भौंह हिलती, तो आती क़यामत! मै… Read more »