मौन का संगीत

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जो लिखे थे आँसुओं से, गा सके ना गीत। अबतलक समझा नहीं कि हार है या जीत।।   दग्ध जब होता हृदय तो लेखनी रोती। ऐसा लगता है कहीं तुम चैन से सोती। फिर भी कहता हूँ यही कि तू मेरा मनमीत। अबतलक समझा नहीं कि हार है या जीत।।   खोजता हूँ दर-ब-दर कि… Read more »