समस्या के साथ समाधान भी सोचें

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मौसम, पर्यावरण, बिजली और पानी के संकट की बात बहुत लोग कहते हैं। कोई बड़े बांधों का विरोधी है, तो कोई समर्थक। कोई शहरों के पक्ष में है, तो कोई ‘भारतमाता ग्रामवासिनी’ की याद दिलाता है। लेकिन हाल ये है कि ‘मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की।’ दुनिया में इलाज की होम्योपैथी, एलोपैथी, आयुर्वेद, यूनानी,… Read more »

मौसमः अच्छी बारिश की बढ़ी उम्मीद

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प्रमोद भार्गव इस बार मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने अच्छी बारिश की उम्मीद जगाई है। यदि यह अनुमान यथार्थ के धरातल पर सटीक बैठता है तो किसानों के चेहरे तो खिलेंगे ही,देश की सकल घरेलू उत्पाद दर भी बढ़ जाएगी। देश के जीडीपी में कृषि का योगदान 15 फीसदी है और खेती-किसानी भी देश का… Read more »

मौसम अपना – अपना …!

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-तारकेश कुमार ओझा- इस गलतफहमी में आप कतई न पड़ें कि मैं किसी समाजवादी आंदोलन का सिपाही हूं। लेकिन पता नहीं क्यों मुझे अपनी खटारा साइकिल से मोह बचपन से ही है। उम्र गुजर गई लेकिन आज न तो साइकिल से एक पायदान ऊपर उठ कर बाइक तक पहुंचने की अपनी हैसियत बना पाया और… Read more »

मौसम की सटीक भविष्यवाणी की मुश्किलें

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-प्रमोद भार्गव- बरसात शुरू होने से पहले मौसम विभाग द्वारा मानसून की, की गई भविष्यवाणियों में फेरबदल चिंता का सबब बन रहा है। मई की शुरूआत में सामान्य से पांच फीसदी कम बरिश होने की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन 9 जून को की गई भविष्यवाणी में कहा गया कि औसत से सात प्रतिशत कम… Read more »

अलनीनो की चपेट में मौसम

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प्रमोद भार्गव बादलों की लुकाछुपी ने देश की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इस हाल ने हमारे मौसम विभाग द्वारा की जाने वाली भाविष्य वाणियों की वैज्ञानिक मान्यता को भी कठघरे में खड़ा किया है। अखिर क्या कारण हैं कि जब दुनिया के वैज्ञानिक जीवनदायी कण की खोज के निकट पहुंचकर गौरवान्वित हो रहे… Read more »

फिसलन का मौसम

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-विजय कुमार इन दिनों देश में सावन और भादों का मौसम चल रहा है। इस मौसम की बहुत सी अच्छाईयां हैं, तो कुछ कमियां भी हैं। वर्षा कम हो या अधिक, परेशानी आम जनता को ही होती है। इन दिनों वर्षा के न होने से, न तो धरती की प्यास बुझेगी और न ही खेत-खलिहान… Read more »