यमुना में जहर रोकिये, जीव पर्यावरण तथा स्मारकों को बचाइये

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तीन प्रजातियों के कीड़े का हमला:- ताजमहल पर एक नहीं, बल्कि तीन प्रजातियों के कीड़े हमला कर रहे हैं। यमुना में फास्फोरस बढ़ने के कारण गोल्डी काइरोनोमस, पोडीपोडीलम और ग्लिप्टोटेन पहुंच रहे हैं। एएसआई को बीते साल की सैंपलिंग में ये तीनों कीड़े हरा रंग छोड़ते हुए मिले थे। हर दिन लाखों की तादात में यह हमला किया गया था। काइरोनोमस फैमली के यह कीड़े 35 डिग्री तापमान में प्रजनन शुरू करते हैं और 50 डिग्री तक के तापमान को झेल सकते हैं। काइरोनोमस मादा कीट एक बार में एक हजार तक अंडे देती है। लार्वा और प्यूमा के बाद करीब 28 दिन में पूरा कीड़ा बनता है। हालांकि कीड़े की मियाद महज दो दिन है लेकिन मादा कीट के अंडे यमुना नदी में भीषण गंदगी और फास्फोरस की मौजूदगी से बन रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थित ताजमहल के पास है। यहां सीवर का बैक्टीरिया बहुत घातक है। एसएन मेडीकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायॉलोजी के हेड डॉ. अंकुर गोयल ने बताया कि सीवर से उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया का नाम ‘इश्चेरियाई कोलाई’ है। यह तमाम बीमारियां फैलाता है। मानक से दस गुना अधिक है।

ज़हरीली होती यमुना आचमन योग्य नहीं

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डा. राधेश्याम द्विवेदी यमुना की त्रासद व्यथा:- कालिंदी का कल-कल निनाद शांत होता जा रहा है। उसकी धारा सिकुड़ती जा रही है । उसका पवित्र जल आचमन योग्य नहीं रहा है । जिससे यमुना प्रेमियों का मन आहत है। यमुना से कृष्ण का अटूट नाता रहा है और इसकी पवित्रता को बरकरार रखने के लिए… Read more »

बदलनी शुरु हो गई आगरा में यमुना की तस्बीर

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यमुना निर्मलीकरण से सम्बन्धित समिति के दिनांक 06.08.2009 के आवेदनपत्र पर तत्कालीन आयुक्त महोदया माननीया राधा एस. चैहान की अध्यक्षता में दिनांक 17.08.2009 को आयुक्त सभागार में एक बैठक भी आहूत हो चुकी है। इसके कुछ विन्दुओं पर कुछ कार्यवाही भी हुई थी और कई अभी भी लम्बित पड़े हैं। इस कार्य के सम्पन्न होने पर जहां भारत की स्वच्छता व हरीतिमा का पुनः दर्शन सुगम हो सकेगा वहीं आगरा शहर एक हेरिटेज सिटी की ओर भी बढ़ सकेगा।

दम तोड़ती भारत की जीवित जीवनदायिनी मैया यमुना

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इसका बड़ा कारण यह है कि दिल्ली के करीब 50 फीसद इलाकों में सीवर नेटवर्क नहीं है। जल बोर्ड के सीवरेज शोधन संयंत्रों की क्षमता करीब 604 एमजीडी है, लेकिन प्रतिदिन करीब 450 एमजीडी सीवरेज शोधित हो पाता है। जल बोर्ड ने 1962 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्टर सीवर लाइन का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू कराया था। अभी तक इसका एक पैकेज पूरा हुआ है। इसके पांच पैकेजों का काम अधूरा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर छोटे नालों के गंदे पानी के शोधन के लिए 14 सीवरेज शोधन संयंत्र लगाने की योजना बनी थी।

आदि का अनंत प्रवाह – यमुना 

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यमुना नाटिका  अरुण तिवारी   इस शिवरात्रि को मैं जीवन यात्रा के 53 वर्ष पूरे कर लिए। मैं जन्म से दिल्ली में हूं। 11 वर्ष का हुआ, तो रहने के लिए बाबूजी हमें यमुना किनारे ले आये। मेरा नया सरकारी स्कूल सिविल लाइन्स में स्थित था। लोहे वाले पुराने पुल से आते-जाते हमारी स्कूल बस… Read more »

यमुना की प्रदूषण मुक्ति पर राजनीति न हो

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ललित गर्ग लंबे समय से दिल्ली न केवल वायु प्रदूषण से बल्कि राजनीतिक प्रदूषण से भी दूषित है। आम जनजीवन की जिंदगी की परवाह किसी को नहीं है। वायु प्रदूषण, यमुना का लगातार दूषित होना, जानलेवा बीमारियों का हावी होना, दीपावली पर आतिशबाजी का धुआं होना, पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब द्वारा पराली जलाने, सड़कों… Read more »

हिण्डन-यमुना-गंगा नदी पंचायत निर्णय

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-अरुण तिवारी-   1. संदर्भ: गंगा के प्रवाह में प्रदूषित पानी की आवक औसतन 700 क्युसेक है; जबकि यदि पूरी क्षमता के साथ वर्षा जल संचयन की कोशिश की जाये, तो गंगा में सतत् प्रवाह की मात्रा को 50 हजार क्युसेक तक बढाया जाना संभव है। उक्त तथ्य को आधार बनाकर श्री दीपक सिंघल (प्रधान… Read more »