यशोदानंदन-५०

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-विपिन किशोर सिन्हा- ढोल-नगाड़ों की ध्वनि मथुरा नगर के बाहर भी पहुंच रही थी। स्नानादि प्रातःकर्मों से निवृत्त होने के पश्चात् श्रीकृष्ण तथा बलराम ने मल्लयुद्ध की रंगभूमि से आ रही नगाड़ों की ध्वनि सुनी। शीघ्र ही तैयार होकर उन्होंने रंगभूमि की ओर प्रस्थान किया। रंगभूमि के विशाल द्वार पर एक विशालकाय हाथी ने भयंकर… Read more »