यह मुर्दों की बस्ती है

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व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है   यूँ भी शेर बचे हैं कितने, बचे हुए बीमार अभी राजा गीदड़ देश चलाते, यह मुर्दों की बस्ती है   गिद्धों की अब निकल पड़ी है, वे दरबार सजाते हैं बिना रोक वे धूम मचाते,… Read more »

यह मुर्दों की बस्ती है

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व्यर्थ यहाँ क्यों बिगुल बजाते, यह मुर्दों की बस्ती है कौवे आते, राग सुनाते. यह मुर्दों की बस्ती है यूँ भी शेर बचे हैं कितने, बचे हुए बीमार अभी राजा गीदड़ देश चलाते, यह मुर्दों की बस्ती है गिद्धों की अब निकल पड़ी है, वे दरबार सजाते हैं बिना रोक वे धूम मचाते, यह मुर्दों… Read more »