यात्रा संस्मरण/ एक अजनबी

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-रा. रं. दरवेश एक अंतहीन यात्रा…. बहुत पुरानी चीनी कहावत है, “दस हज़ार किताबों को पढने से बेहतर , दस हज़ार मील की यात्रा करना है” रात के 10 :30 हो चुके है और मै अपनी खिड़की में बैठा , दूर-सुदूर तक फैले हुए खेतों को देख रहा हूँ…बाहर घुप्प अँधेरा है…और शायद भीतर भी…आकाश… Read more »