याद तुम्हारी

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मधु शर्मा कटिहा खुश बहुत थी याद तेरी अब मुझे आती नहीं, डूबकर इक अक्स में अब मैं खो जाती नहीं। उफ़! भूलते ही याद आ गया फिर से तू क्यों? कोई रिश्ता ही नहीं तो दर्द भी देते हो क्यों?   चल रही हवा तो पत्ते चुप से हैं मायूस क्यों? रोशनी सूरज की… Read more »