एकात्म फीचर सेवाः कांग्रेस के दोहरे मापदण्ड

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-वीरेन्द्र सिंह परिहार- कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उसे लोकसभा में किसी भी हालात में नेता प्रतिपक्ष का दर्ज मिलना ही चाहिए। भले ही निर्धारित संवैधानिक व्यवस्था के तहत उसे लोकसभा में सम्पूर्ण सीटों का दस प्रतिशत अर्थात पचपन सीटें न प्राप्त होकर मात्र 44 सीटेें ही प्राप्त हो। कांग्रेस का तर्क है कि… Read more »

अपने निर्णय का सम्मान कीजिये

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-ऋतु के. चटर्जी- कैसे सोच लिया जनता ने कि जाने वाली सरकार उनके लिए अपने कार्यालयों में मिठाई के डब्बे छोड़ जाएगी. जब नयी सरकार, पुरानी सरकार द्वारा पहले से तैयार बजट को सामने लेकर आई तो लगे शोर मचाने, ठीक ही कहा है किसी ने कि सबको एकसाथ खुश रख पाना बेहद मुश्किल या… Read more »

नेहरू हार गये और सावरकर जीत गये

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-राकेश कुमार आर्या- अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। इस हार से पहुंचे ‘सदमे’ से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता अभी उभर नही पाए हैं। देश के लिए कांग्रेस का हार जाना बुरी बात नही है, बुरी बात है… Read more »

सरकार के जाने का समय अभी नहीं आया है

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सिद्धार्थ शंकर गौतम अर्थव्यवस्था के लिए कड़े सुधारों को बिना सहयोगी दलों से विचार-विमर्श किए जनता पर लादना केंद्र सरकार को महंगा पड़ने लगा है| मंगलवार शाम हुई तृणमूल कांग्रेस की बैठक के बाद ममता ने सरकार से समर्थन वापसी का एलान क्या किया मानो राजनीतिक परिदृश्य में ही भूचाल ही आ गया| कोई मध्यावधि… Read more »

वर्तमान राजनीतिक तंत्र आपातकाल से भी ज्यादा खौफनाक है

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लालकृष्ण आडवाणी पिछले साठ वर्षों से भारत स्वतंत्र है। नागरिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के संदर्भ में, मैं आपातकाल की अवधि 1975-77 को सर्वाधिक खराब मानता हूं। लेकिन राजनीतिक व्यंग्यकार और भ्रष्टाचार विरोधी संघर्षकर्ता असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उससे मुझे आश्चर्य होने लगा: क्या आज का राजनीतिक तंत्र आपातकाल… Read more »

मनमोहन प्रेम का अंत

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जगदीश्‍वर चतुर्वेदी मनमोहन सरकार का आम जनता के साथ अन्तर्विरोध प्रखर हो गया है। जिन लोगों ने यह सपना देखा था कि नव्य आर्थिक नीतियां मध्यवर्ग के लिए फायदेमंद हैं और यह वर्ग कम से कम चैन की बंशी बजाएगा।आज वे लोग निराश हैं। मनमोहन सरकार ने मध्यवर्ग के चैन को बेचैनी में बदल दिया… Read more »

मनमोहन सरकार अपने निकम्मेपन को स्वीकारना सीखे

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सिद्धार्थ शंकर गौतम संसद सत्र से ठीक पहले वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मनमोहन सिंह सरकार की कमजोरियों को उजागर करते हुए २०१४ के बाद आर्थिक सुधार होने बाबत बयान दिया; उससे कांग्रेस और सरकार दोनों भौचक हैं| बसु का यह बयान ऐसे वक़्त में आया है जब… Read more »

भ्रष्टाचार के मामले में यू.पी.ए. का रिकार्ड नं.1 है

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लालकृष्‍ण आडवाणी समाचारों के कवरेज के अनुसार, बहुसंस्करण वाले अधिकतर दैनिक क्षेत्रीय समाचारपत्र बनते जा रहे हैं। चेन्नई से प्रकाशित होने वाला दि हिन्दू ऐसा समाचारपत्र है जिसके बारे में मेरा मानना है कि देश के किसी भी क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाएं उसमें पढ़ने को मिले, जरूरी नहीं है। अत: उसका ‘कवरेज‘ वास्तव में राष्ट्रव्यापी… Read more »

महज 20 महीने और भ्रष्टाचार के 50 महाघोटाले!

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लिमटी खरे ‘‘कांग्रेस का इतिहास अति गौरवशाली कहा जा सकता है। भारत गणराज्य की स्थापना में कांग्रेस के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इसमें महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू की भूमिका को भी कतई नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। आजादी के उपरांत कांग्रेस के लिए नेहरू गांधी परिवार का तात्पर्य… Read more »

बीमार सारथी, खस्ता रथ

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हिमकर श्याम सत्ता में वापसी के बाद यूपीए सरकार सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी और सरकार की मुक्तिदायिनी और चतुर सारथी सोनिया के न रहने से यह संकट और बढ़ गया है। पार्टी और सरकार दोनों बेलगाम और खस्ताहाल नजर आ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सोनिया सारथी की भूमिका… Read more »