पुस्तक समीक्षा ; ‘ये तय हुआ था’

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शादाब जफर ‘‘शादाब’’ लोकसभा में कार्यरत बचपन से आज तक मेरी दोस्ती की डोर में बंधे मेरे अज़ीज़ दोस्त शहजाद जी ने अभी कुछ दिनो पहले बडे से लिफाफे में बंद मुझे एक गजल संग्रह समीक्षार्थ दिया और बोले समीक्षा लिखनी है। मैने पूछा किस का है बोले मेरे साथ ही लोकसभा में है उन… Read more »