योगाचार्य स्वामी दिव्यानन्द सरस्वती जी से साक्षात्कार

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एक बार मैं साधना में था, मुझे पता ही नहीं चला कि सत्संग यज्ञ भी खतम हो गया। दो घंटे यज्ञ चलता है। रात्रि हो गई। साधको ने अनुभव किया और कहा कि स्वामी जी आपको समाधि लग गई, आपको पता नहीं चला। हम तो यज्ञ भी करके आ गये।’ स्वामी जी ने हमें कहा कि हमें भी इसी प्रकार से साधना करनी चाहिये। सभी लोगों को साधना जरूर करनी चाहिये। अपने विषय में वह बोले, ‘मुझे जो कार्य दिया गया, मैंने युक्ति व बल से किया। किसी काम को मैंने भार रूप अनुभव नहीं किया। सभी कामों को मैंने सदैव श्रद्धापूर्वक किया।’