योग करो भई योग करो

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-विमलेश बंसल ‘आर्या’ यदि चाहो कल्याण विश्व का, योग करो सब योग करो| यदि चाहो नित खुशियाँ पाना|| योग करो भई योग करो|| योग ही सत है , योग ही ऋत है, योग ही रस, अमृत, मधु, घृत है | योग प्रेम है, योग क्षेम है, योग ही संबल प्रभु श्रुति पथ है॥ यदि चाहो… Read more »