प्रकृति और प्रकत्र्ता दोनों से मिलाता है योग

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शब्द प्रकृति दो शब्दों से बनता है-प्र+कृति। ‘प्र’ का अर्थ है-उत्तमता से, पूर्ण विवेक से और ‘कृति’ का अर्थ है-रचना। इस प्रकार प्रकृति का अर्थ है एक ऐसी रचना जिसे उत्तमता से, नियमों के अंतर्गत रहते हुए और विवेकपूर्वक बनाया गया है, रचा गया है। प्रकृति अपने नियमों से बंधी है, और वह उनके बाहर… Read more »

किन-किन बीमारियों में योग कारगर?

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अगर आप योग दिवस के अवसर पर भी सिर्फ इसलिए योग नहीं कर रहे कि पता नहीं इससे कोई फायदा होगा या नहीं तो अब आपकी शंका का समाधान हो चुका है। इस बात के क्लिनिकल प्रमाण मिल गए हैं कि कई तरह के योगासन और क्रियाएं बीमारियों का निदान कर सकती हैं। मंगलवार को… Read more »

कमाई का योग

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दिल्ली का राजपथ गवाह  है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 21 जून, 2015 को विश्व के 192 देश योगपथ पर भारत के साथ चले तो पूरे विश्व में योग का डंका बजने लगा। कुछ समय पहले तक जिस योग को  ऋषि मुनियों की साधना और स्वस्थ जीवन के आधार समझा जाता था आज… Read more »

योग से जुड़ रही है दुनिया

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संजय द्विवेदी भारतीय ज्ञान परंपरा में योग एक अद्भुत अनुभव है। योग भारतीय ज्ञान का एक ऐसा वरदान है, जिससे मनुष्य की चेतना को वैश्विक चेतना से जुड़ने का अवसर मिलता है। वह स्वयं को जानता है और अपने परिवेश के साथ एकाकार होता है। विश्व योग दिवस, 21 जून के बहाने भारत को विश्व… Read more »

भोग से मुक्ति का मार्ग दिखाता है योग

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आज जब सम्पूर्ण विश्व योग के महत्व को समझ रहा है तो हम लोग भी इसे अपने आचरण में उतार कर न सिर्फ अपने स्वयं के स्वास्थ्य बल्कि अपने आस पास के सम्पूर्ण वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। जिस प्रकार हमारे शरीर का कोई भी अंग तभी तक जीवित रहता है जब तक कि वह हमारे शरीर से जुड़ा है,कोई भी फूल, पत्ता या फिर फल जब तक अपने पेड़ से जुड़ा है सुरक्षित एवं संरक्षित है उसी प्रकार हमें भी अपनी सुरक्षा के लिए प्रकृति से जुड़ना होगा यह बात योग हमें सिखाता है।

योग साधना से ईश्वर की प्राप्ति ही मनुष्य जीवन का प्रमुख उद्देश्य

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ऋषि दयानन्द योग विषयक अपने व्याख्यान में सत्यार्थप्रकाश के सप्तम् समुल्लास में कहते हैं कि जो उपासना (अर्थात् योग) करना चाहे, उसके लिये यही आरम्भ है कि वह किसी से वैर न रक्खे। सर्वदा सब से प्रीति करे। सत्य बोले। मिथ्या कभी न बोले। चोरी न करे। सत्य व्यवहार करे। जितेन्द्रिय हो। लम्पट न हो और निरभिमानी हो। अभिमान कभी न करे।

पूरी दुनिया में छा गया योग

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21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक बार फिर भारत का योग पूरी दुनिया में छा गया। भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में योग दिवस की महाधूम रही। जल ,थल एवं नभ लगभग सभी जगहों पर किसी न किसी रूप में जनमानस ने येाग अपनाया और उसे सीखने तथा स्वस्थ्य रहने के… Read more »

मोदी की उपलब्धि, योग की पताका

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प्रधानमंत्री आते हैं और जाते हैं। किसी को उनके नाम भी याद नहीं रहते। 15-20 साल बाद लोग यह भी भूल जाते हैं कि भारत का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कौन कब रहा है? आगरा, दिल्ली और काबुल में कई बादशाह हुए, अब उन्हें कौन जानता है? उनका जन्म-दिन न कोई मनाता है और न ही… Read more »

योग के साथ ‘ऊॅं‘ का फैलता दायरा

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प्रमोद भार्गव इस बार योग के साथ ‘ऊॅं‘ का दायरा भी विस्तृत हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंडीगढ़ में योग के साथ ‘ऊॅं‘ का उच्चारण करेंगे, वहीं बाबा रामदेव जोधपुर में सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ योग कराएंगे। 190 देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है, जिनमें 40 मुस्लिम देश शामिल… Read more »

ह्रदय की प्रकृति का संरक्षण ही योग

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(‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ 21 जून 2016 पर विशेष) योग भारतीय प्राचीन संस्कृति की परम्पराओं को समाहित करता है। भारत देश में योग का प्राचीन समय से ही अहम स्थान है। पतंजली योग दर्शन में कहा गया है कि- योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो… Read more »