तुम्हें देश का प्रणाम ‘टाटा’

Posted On by & filed under विविधा

-राकेश उपाध्‍याय आफतों और विपदाओं में जो साथ न छोड़े वही सच्चा दोस्त है, यार है। उससे बड़ा हितचिंतक कोई और नहीं हो सकता। कार्पोरेट जगत में आज जहां केवल मुनाफा और मुनाफा ही सबसे बड़ा मंत्र बना हुआ है, कंपनियां अपने उपर मंडराते संकट को देखकर पहला काम यदि शुरू करती हैं तो वह… Read more »

‘रतन‘ के बाद कौन कहेगा ‘टाटा‘

Posted On by & filed under विविधा

-लिमटी खरे भारत गणराज्य में टाटा समूह एक किंवदंती बनकर रह गया है। टाटा ग्रुप के वर्तमान अध्यक्ष रतन टाटा ने 1991 में इसके अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था, उसके बाद टाटा गु्रप ने पीछे मुडकर नहीं देखा। लगभग बीस सालों के कारोबार में रतन टाटा के नेतृत्व मंे टाटा गु्रप के राजस्व में पच्चीस… Read more »