मुझे भी गालियाँ पड़ती हैं, पर मै आपकी तरह सार्वजनिक रुदन नहीं करता, रवीश कुमार!

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मेरी ही तरह और भी तमाम लेखक मित्रों को ये सब सुनना पड़ता होगा, लेकिन उन्हें भी कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ऐसी ही प्रतिक्रियाओं से रवीश का जीना मुश्किल हो गया है, तो इसका क्या मतलब समझा जाय ? या तो ये कि उनकी निर्भीकता की सब बातें हवाई हैं अथवा ये कि वे डरने का बहुत अच्छा अभिनय कर रहे हैं। बिलकुल वैसा ही ‘अच्छा अभिनय’ जैसा रवीश की रिपोर्ट में करते थे। सच क्या है, रवीश ही जानें। हाँ, सोए हुए को जगाया जा सकता है, सोने का अभिनय करने वाले को नहीं। पत्रकारिता के छात्रों से भी कहना चाहूँगा कि चयन का अधिकार आपको है, लेकिन अपना पत्रकारीय आदर्श चुनने से पहले महान निर्भीक पत्रकारों की विरासत और अपने वर्तमान चयन की तुलना कर लीजिएगा।

रवीश कुमार, अब जनता ‪#‎FakeItLikeNDTV‬ और आप जैसों की हिप्पोक्रेसी को समझने लगी है!

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 ‪#‎JnuCrackDown‬ वाह रवीश! आज एक अर्णव गोस्वामी, एक दीपक चौरसिया, एक रोहित सरदाना आपको टीवी का स्क्रीन ब्लैंक छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है! आज आपको टीवी एंकरों पर पश्चाताप हो रहा है! लेकिन जब आपके इसी एनडीटीवी की एक संपादक बरखा दत्त की रिपोर्टिंग के कारण कारगिल में जवान मरे, 26/11 में एनडीटीवी… Read more »

भारत में कौन बनेगा जूलियन असांजे, कौन करेगा विकिलीक्‍स

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अविनाश दास फेसबुक पर टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने एक सोसा छोड़ा कि भारत का विकिलीक्‍स कौन हो सकता है। उन्‍होंने कुछ वेबसाइट्स के नाम भी गिना दिये। कई लोगों ने बता भी दिया कि ये ये हो सकते हैं। यह भी हमारे समय और समाज की विचित्रता का एक उदाहरण ही है कि अंतरराष्‍ट्रीय… Read more »