भीड़ प्रबंधन में नाकाम प्रशासन

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हमारे धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन विराट रुप लेते जा रहे हैं। कुंभ मेलों में तो विशेष पर्वों के अवसर पर एक साथ तीन-तीन करोड़ तक लोग एक निश्चित समय के बीच स्नान करते हैं। लेकिन भीड़ के अनुपात में यातायात और सुरक्षा के इंतजाम देखने में नहीं आते। जबकि शासन-प्रशासन के पास पिछले पर्वों के आंकड़े हाते है। बावजूद लापरवाही बरतना हैरान करने वाली बात है। दरअसल, हमारे यहां धार्मिक आयोजनों में जितनी भीड़ पहुंचती है और उसके प्रबंधन के लिए जिस प्रबंध कौषल की जरुरत होती है, उसकी दूसरे देश कल्पना भी नहीं कर सकते ? इ