राजेन्द्र यादव के हंस-महल में तरुण भटनागर की सेंधमारी

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राजीव रंजन प्रसाद राजेन्द्र यादव के इस दुस्साहस की सराहना अवश्य करूंगा कि उन्होंने बस्‍तर के युवा कथाकार तरुण भटनागर के साथ हुए अपने संवादों के पत्र को सम्पादकीय (‘हंस, सितम्बर-2012 अंक’) बनाकर प्रस्तुत किया है। राजेन्द्र यादव बेनकाब हुए हैं और तरुण ने निर्भीक और गैर-समझौतावादी लेखन की अद्वितीय परिभाषा गढी है। पहले चर्चा… Read more »