हाँथी जी की शादी

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हाँथी जी की शादी थी, दिन महज बचे थे चार| दरजी ना कर पाया था, उनके कपड़े तैयार| बीमारी से दरज़ी की, माता जी थीं बेहाल| ऊनकी दवा कराने दर्ज़ी चला  गया भोपाल| बिना सूट के कैसे होगी, शादी,गज घबराया| सभी जानवरों को उसने, रो रो कर हाल  सुनाया| बड़े बुज़ुर्गों ने आपस में, सहमति… Read more »