हास्य व्यंग्य कविताएं : शिष्टाचार, भाईचारा, मौज

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मिलन  सिन्हा                             शिष्टाचार माल सब साफ़ किया विकास के नाम पर विनाश किया भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार है कहो न प्यार है.   भाईचारा ‘भाईचारा’ का शानदार नमूना देखिये घर का चारा खानेवाला खा रहा अब ‘भाई’ का ‘चारा’ देखिये.   मौज… Read more »