हास्य व्यंग्य कविता : परेशान ‘मेल’

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मिलन सिन्हा      मैनेजर  ने बड़े  बाबू से  पूछा, ये क्या हाल बना  रक्खा है, टेबुल पर फाइलों का अंबार लगा रक्खा है ? क्या बात है, कुछ  कहते क्यों नहीं ? सर, कहने से  क्या लाभ हमीं अब बदल रहें है अपना स्टाइल, अपना स्वभाव ! सर, हम जो मर्द हैं न, अर्थात… Read more »

हास्य व्यंग्य कविता : माडर्न पत्नी के माडर्न विचार

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 मिलन  सिन्हा   सावन की सुहानी रात थी पति पत्नी की बात थी कहा, पति ने बड़े प्यार से देखो, प्रिये कल मुझे आफ़िस जल्दी है जाना वहां बहुत काम पड़ा है सब मुझे ही है निबटाना . प्लीज ,जाने मन कल, सिर्फ कल बना लेना अपना खाना इसके लिए मैं तुम्हारा  ‘ग्रेटफूल’  रहूँगा आगे… Read more »

हास्य व्यंग्य कविता : आरोप और आयोग

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मिलन सिन्हा आरोप और आयोग हमारे महान देश में जब जब घोटाला होता है और हमारे  मंत्रियों , नेताओं  आदि पर गंभीर आरोप लगाया जाता है तब तब सरकार  द्वारा पहले तो इसे बकवास बताया जाता है लेकिन, ज्यादा हो-हल्ला होने पर एक जांच आयोग बैठा दिया जाता है आयोग का कार्यकाल महीनों, सालों का… Read more »

हास्य व्यंग्य कविता: गांधीवादी परम्परा

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मिलन सिन्हा हमारे  नेता जी काफी चर्चित थे . जनता से जो काम करने को कहते थे उसे पहले खुद करते थे . इस  मामले वे अपने को पक्के सिद्धान्तवादी-गांधीवादी कहते थे . एक बार उन्होंने कहा, हम गरीबी हटाकर रहेंगे अब गरीबी रहेगी या हम रहेंगे . सिद्धान्त के मुताबिक  उन्होंने पहले अपनी गरीबी… Read more »