हिंदी का बढ़ता प्रभाव

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अरविंद जयतिलक हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अब बहुत चिंतित होने की जरुरत नहीं है। हिंदी अपने दायरे से बाहर निकल विश्वजगत को अचंभित और प्रभावित कर रही है। एक भाषा के तौर पर वह अपने सभी प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ दी है। विगत दो दशकों में जिस तेजी से हिंदी का अंतर्राष्ट्रीयविकास हुआ है… Read more »