हिंदी दिवस या हिन्दी विमर्श

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एम् एम्. चन्द्रा हिंदी दिवस पर बहस चल रही थी. एक वर्तमान समय के विख्यात लेखक और दूसरे हिंदी के अविख्यात लेखक. हम हिंदी दिवस क्यों मानते है? कोई दिवस या तो किसी के मरने पर मनाया जाता है या किसी उत्सव पर, तो ये हिंदी दिवस किस उपलक्ष में मनाया जा रहा है. अविख्यात… Read more »

व्यंग्य बाण: हिन्दी ओढ़ें, देवनागरी बिछाएं

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विजय कुमार  पिछले दिनों किसी काम से शर्मा जी के घर गया, तो उनकी मेज पर चिट्ठियों और निमन्त्रण पत्रों का ढेर लगा था। उन्होंने मेरी ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया और पत्रों से उलझे रहे। – क्या बात है शर्मा जी, बड़े व्यस्त लग रहे हैं ? – हां भई, 14 सितम्बर आ… Read more »

वाद, विवाद, अनुवाद की छाया से मुक्त हो हिन्दी पत्रकारिता

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ऋतेश पाठक हिन्दी के सर्वप्रथम दैनिक उदन्त मार्तण्ड के प्रथम और अंतिम संपादक पंडित युगल किशोर शुक्ल ने लिखा था ‘‘इस ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नांव पढ़ने के पहिले पछाहियों के चित का इस कागज नहोने से हमारे मनोर्थ सफल होने का बड़ा उतसा था। इसलिए लोग हमारे बिन कहे भी इस कागज की सही की… Read more »

कविता / हिन्दी पखवाड़ा

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भाषा जो सम्पर्क की हिन्दी उसमे मूल। बनी न भाषा राष्ट्र की यह दिल्ली की भूल।।   राज काज के काम हित हिन्दी है स्वीकार। लेकिन विद्यालय सभी हिन्दी के बीमार।।   भाषा तो सब है भली सीख बढ़ायें ज्ञान। हिन्दी बहुमत के लिए नहीं करें अपमान।।   मंत्री की सन्तान सब अक्सर पढ़े विदेश।… Read more »

व्यंग्य/ हिंदी ! तेरा पखवाड़ा अमृत!!

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-अशोक गौतम जो हाल शांति की तलाश में कस्तूरा हो भटक रहे मेरे शहर में किसी ऐरे गैरे नत्थू खैरे बाबा के आने पर भक्तिमय हो जाता है वही हाल हिंदी पखवाड़े के आने पर मेरे देश का हो जाता है। जो आदरणीय बंधु सारा साल अंग्रेजी थूक-थूक कर पूरे देश का थोबड़ा थुकियाए रहते… Read more »

सिर्फ रस्म बन कर न रह जाए ये दिन : पूजा श्रीवास्‍तव

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एक बार फिर 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाने के लिए लोग तैयार हैं। सर्वविदित है कि इस दिन कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। कई संगोष्ठियां, कई परिचर्चाएं होती हैं और तमाम लोग हिन्दी के प्रति अपने प्रेम को जाहिर करते हैं। हिन्दी की दुर्दशा पर घडिय़ाली आंसू भी बहाए जाते है। पर सवाल ये… Read more »

हिन्दी दिवस पर कुछ यक्ष प्रश्न

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-डॉ. अभिज्ञात हिन्दी के बारे में यह मातम मनाने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है कि उसकी गरिमा को उन शब्दों से ठेस पहुंच रही है जो मूलतः हिन्दी के हैं ही नहीं। वे अंग्रेज़ी, मराठी, बंगला, पंजाबी या दूसरी भारतीय या विदेशी भाषाओं से आयातित हैं। दूसरी भाषाओं के मेल-जोल से जो भाषा बन रही… Read more »

हिंदी दिवस पर विशेषः विलाप मत कीजिए, संकल्प लीजिए !

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– संजय द्विवेदी राष्ट्रभाषा के रूप में खुद को साबित करने के लिए आज वस्तुतः हिंदी को किसी सरकारी मुहर की जरूरत नहीं है। उसके सहज और स्वाभाविक प्रसार ने उसे देश की राष्ट्रभाषा बना दिया है। वह अब सिर्फ संपर्क भाषा नहीं है, इन सबसे बढ़कर वह आज बाजार की भाषा है, लेकिन हर… Read more »

हिन्दी दिवस की रस्म अदायगी

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-फ़िरदौस ख़ान देश की आज़ादी को छह दशक से भी ज़्यादा का वक़्त बीत चुका है। इसके बावजूद अभी तक हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा हासिल नहीं हो पाया है। यह बात अलग है कि हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन कर रस्म अदायगी कर ली जाती है। हालत… Read more »

राजभाषा हिंदी – अनुवाद एवं तकनीकी समावेश की सार्थकता

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दिलीप कुमार पांडेय, संयुक्त सचिव, राजभाषा, गृह मंत्रालय, भारत सरकार स्वातंत्र्योत्तर भारत में स्वाधीनता और स्वावलम्बन के साथ-साथ स्वभाषा को भी आवश्यक माना गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद गांधीजी ने खुले शब्दों में कहा कि ‘प्रांतीय भाषा या भाषाओं के बदले में नहीं बल्कि उनके अलावा एक प्रांत से दूसरे प्रांत का संबंध जोड़ने… Read more »