हिंदी साहित्य में बाजारवाद: चुनौतियां और समाधान

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-डॉ. भगवान गव्हाडे- हिंदी साहित्येतिहास के हर काल में बाजार का वर्णन किसी न किसी रूप में होता रहा है । कबीर, सूर, तुलसी, मीरा आदि अनेक संत कवियों के काव्य में भी बाजार की उपस्थिति दर्ज की गई है । बाजार हमारी आवश्यकताओं की परिपूर्ति करता था क्योंकि बाजार और मेलों के साथ आनंद… Read more »