सुशासन के कीर्तिमान गढ़ने का समय

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अब समय आ गया है जब भाजपा को प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए विशिष्ट आचार संहिता का प्रावधान करना चाहिए , जिसमें नैतिकता , सदाचार , इमानदारी, संवेदनशीलता और सहृदयता जैसे उच्च मानक हो जिनके पालन को सुनिश्चित कराया जाए । क्योंकि भले ही जनता ने मोदी जी और पार्टी की विचारधारा पर विश्वास करके भाजपा को वोट दिया हो परंतु रोजमर्रा की समस्याओं के लिए कार्यकर्ताओं जनता का साबका पार्षद , विधायको और सांसदों से ही पड़ता है ।अगर इन लोगों का आचरण विपरीत किस्म का होगा तो जनता का विश्वास टूटेगा और उसे दूसरे विकल्प की तरफ देखना पड़ेगा ।

हिंदुत्व की नई परिभाषा में है सच्चा राष्ट्रवाद

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान ऐसा बयान दे दिया है, जो हिंदुत्व शब्द की परिभाषा ही बदल सकता है। अभी तक भारत में हिंदू किसे कहा जाता है और अहिंदू किसे? पहले अहिंदू को जानें। जो धर्म भारत के बाहर पैदा हुए, वे अहिंदू… Read more »

मोहन भागवत का हिंदुत्व

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया श्री मोहन भागवत ने अपनी मप्र यात्रा के दौरान ऐसा बयान दे दिया है, जिसे लेकर देश में जोरदार विवाद छिड़ जाए तो मुझसे ज्यादा प्रसन्न कौन होगा? मैंने लगभग दस साल पहले छपी मेरी पुस्तक, ‘भाजपा, हिंदुत्व और मुसलमान’ में इसी प्रश्न को उठाया था। मूल… Read more »

दीवाली उपहार है हिंदुत्व की परिभाषा की पुनर्स्थापना

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हिन्दुस्थानियों के एक बड़े व महान पर्व दीवाली के एन पूर्व पिछले सप्ताह एक हलचल कारी घटना हुई , जिसनें हिन्दुओं की दीवाली पूर्व ही दीवाली मनवा दी हुआ यह कि देश केउच्चतम न्यायालय ने यह जांच प्रारम्भ की कि हिंदुत्व भारतीय जीवन शैली का हिस्सा है या फिर धर्म है. तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दायर… Read more »

हिंदुत्व नहीं, थोक वोट पर बहस की जाए

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क्या हिंदुत्व को धर्म माना जा सकता है? वास्तव में हिंदुत्व न तो धर्म के वास्तविक हिसाब से धर्म है और न ही सांप्रदायिक अर्थ में धर्म है। यह शब्द ही अपने आप में एक पहेली है। हिंदू लोग जिन्हें अपने पवित्र धर्मग्रंथ मानते हैं, उनमें हिंदू शब्द का कहीं उल्लेख भर भी नहीं है। न वेदों में, न दर्शनों में, न उपनिषदों में, न गीता में! उल्लेख कहां से होता?

हिंदुत्‍व ही देश की राष्‍ट्रीय अस्मिता है : रूसी करंजिया

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भारत के पत्रकारिता जगत में रूसी करंजिया के नाम से कौन अपरिचित है। स्‍व. करंजिया अत्‍यंत लोकप्रिय साप्‍ताहिक ‘ब्लिट्ज’ के वर्षों तक सम्‍पादक रहे। अंग्रेजी तथा हिंदी सहित कुछ अन्‍य भाषाओं में प्रकाशित होने वाला यह साप्‍ताहिक कभी दूर-दराज के कस्‍बों व गांवों तक पहुंचता था। सनसनीखेज समाचारों की खोज व प्रकाशन इसकी विशेषता थी।… Read more »

हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा

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वेदान्त का सर्वविदित सूत्र है – एकं सद विप्रा बहुधा वदन्ति – एक ही सत्य विद्वान अनेक तरह से कहते हैं। बाइबिल में भी सत्य है, कुरान में भी सत्य है, वेदों में भी सत्य है। ये सभी सत्य अन्त में जाकर परम सत्ता के परम सत्य में विलीन हो जाते हैं। यह कहना कि… Read more »

राहुल गांधी के इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है : डॉ. मीणा

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हिन्दू शूद्रों और स्त्रियों के ताकतवर होने से महान भारत और हिन्दुत्व कमजोर होता है!  डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’  विकीलीक्स के खुलासे के नाम पर कुछ समय से वेब मीडिया पर इस बात को प्रचारित किया जा रहा है कि कॉंग्रेस के महासचिव राहुल गॉंधी ने यह कहा था कि ‘‘भारत को हिन्दुत्व से खतरा… Read more »

साम्‍प्रदायिकता के बहाने हिंदुत्‍व एवं संघ से निपटने की चाल

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अमरनाथ  कभी देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को धमकाते हुए कहा था कि मैं संघ को नेस्तनावूद कर दूँगा। संघ को कुचलने का उन्होने भरसक प्रयत्न भी किया। गाँधीजी की हत्या का दोषारोपण के कारण आज भी कांग्रेसी संघ के माथे यदा-कदा मढ़ते रहते हैं। उन्होंने कांग्रेस के संविधान… Read more »

हिन्दुत्व को सबसे बड़ा खतरा छद्महिन्दुत्वादियों से है!

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’  यदि हिन्दुओं को इस शताब्दी को अपनी अर्थात् हिन्दुओं की शताब्दी बनाना है तो धर्मग्रंथों के मार्फत पोषित जन्मजातीय कुलीन अहंकार से परिपूर्ण वर्णवादी, अवैज्ञानिक, अतार्किक, संकीर्ण, शुद्र, अव्यावहारिक और साम्प्रदायिक बातों से मुक्त होकर हिन्दुओं को न मात्र भारतीय, बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय लोकतान्त्रितक मूल्यों को स्वीकार करके और इन्हें अपने जीवन… Read more »