जब उनसे मोहब्बत थी

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-रंजीत रंजन सिंह- चिट्ठियों का जमाना था जब उनसे मोहब्बद थी, मेरा दिल भी आशिकाना था जब उनसे मोहब्बद थी। रातें गुजर जाती थीं, उनकी चिट्ठियों को पढ़ने में, मैं भी लहू से खत लिखता था जब उनसे मोहब्बत थी। आंख के आंसू सूख गए उनके खतों को जलाने में, कभी समंदर जैसा गहरा था… Read more »

कब से भटकता है सफीना

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-जावेद उस्मानी- साहिलों की जुस्तजू में, कब से भटकता है सफीना जाता है क़रीबे भंवर, कि कहीं नाख़ुदा तो मिल जाए स्याही से खींचते हैं कुछ लोग, सेहर की उम्मीद को उनको भी काश कभी कोई मशाले हुदा तो मिल जाए ढूढ़ते रहते हैं खुद को हर जा, कहीं हम हैं भी कि नहीं हैं… Read more »