हिन्दी प्रेस का पैनापन

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बी  एन  गोयल   अभी हाल ही में ओम थानवी जनसत्ता के संपादक के पद से सेवा मुक्त हुए हैं। पाठकों ने कुछ प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। उमेश चतुर्वेदी जी ने एक लेख में थानवी जी के माध्यम से जनसत्ता की अच्छी व्याख्या की है। पढ़ते हुए मुझे अपना समय याद आ गया जब 1961… Read more »