हिन्दी बुद्धिजीवियों से भागता हिन्दी मीडिया

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी हिन्दी में अधूरी तस्वीर देखने का रिवाज है। अधूरी इमेजों में भ्रमित रहने वालों को यह भ्रम होता है कि वे ही हिन्दी के पब्लिक इंटलेक्चुअल या जन-बुद्धिजीवी हैं। हिन्दी में किसे पब्लिक इंटलेक्चुअल कहें और किसे न कहें। इस सवाल पर सबसे ज्यादा दुविधा है। जो टीवी पत्रकार हैं वे अपने को… Read more »