हिंदी मुद्दा: अडिग रहें मोदी, पीछे न हटें

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-प्रवीण गुगनानी- नरेन्द्र मोदी ने जब कहा कि वे विदेश यात्राओं के दौरान और अन्य राजनयिक अवसरों पर वैश्विक नेताओं से हिंदी में ही करेंगे तो देश में हिंदी को लेकर गौरव भाव और प्रतिष्ठित हो चला था. किन्तु हाल ही में गृह मंत्रालय ने जब द्रविड़ नेताओं के अनावश्यक और लचर दबाव में आते… Read more »

हिंदी प्रचार-प्रसार : एक कड़वा सच

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-बीएन गोयल- प्रवक्ता में प्रकाशित डॉ. मधुसूदन के लेख और उस पर हुई प्रतिक्रिया स्वरूप डॉ. महावीर शरण जैन की टिप्पणी हिंदी के प्रचार प्रसार के सन्दर्भ में अत्यधिक प्रासंगिक है। यह एक प्रकार से दो विद्वानों के बीच एक साहित्यिक शास्त्रार्थ है। इसी दौरान भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने अपना काम काज हिंदी… Read more »

भारतीय भाषाओं के विकास का अपेक्षित विकास

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-प्रोफेसर महावीर सरन जैन- -भारत में एक ओर बहुभाषिकता दूसरी ओर भिन्न भाषा परिवारों की भारतीय भाषाओं की भाषिक समानता तथा भारतीय भाषाओं के विकास का अपेक्षित विकास न होने के मूल कारण की विवेचना- भारत में भाषाओं, प्रजातियों, धर्मों, सांस्कृतिक परम्पराओं एवं भौगोलिक स्थितियों का असाधारण एवं अद्वितीय वैविध्य विद्यमान है। विश्व के इस… Read more »

द्वितीय महायुद्ध के पश्चात विदेशों में हिन्दी भाषा से सम्बंधित अध्ययन

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-प्रोफेसर महावीर सरन जैन- विदेशों में हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में प्रचुर एवं महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। प्रस्तुत आलेख में हम उन अनेक देशों के हिन्दी साहित्य के सर्जकों के योगदान की चर्चा नहीं करेंगे। इसके सम्बंध में अलग आलेख में विचार किया जाएगा। प्रस्तुत आलेख में हिन्दी भाषा की शिक्षण सामग्री, वार्तालाप, शब्दकोशों तथा… Read more »

इंटरनेट पर हिन्दी वालों में भाषायी विभ्रम

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-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी समझ में नहीं आता कहां से बात शुरू करूँ,शर्म भी आती है और गुस्सा भी आ रहा है। वे चाहते हैं संवाद करना लेकिन जानते ही नहीं हैं कि क्या कर रहे हैं,वे मेरे दोस्त हैं। बुद्धिमान और विद्वान दोस्त हैं। वे तकनीक सक्षम हैं । किसी न किसी हुनर में विशेषज्ञ हैं।… Read more »