“वसुधैव कुटुम्बकम” के विपरीत जातिबाद में बंटा समाज

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डा. राधेश्याम द्विवेदी भारत में जाति सर्वव्यापी तत्व है । ईसाइयों, मुसलमानों, जैनों, बौद्धों और सिखों में भी जातियां हैं और उनमें भी उच्च, निम्न तथा शुद्ध-अशुद्ध जातियों का भेद विद्यमान है, लेकिन बात सिर्फ हिन्दू जातियों की इसलिए होती है, क्योंकि हिन्दू बहुसंख्यक हैं और जातियों में फूट डालकर या जातिवाद को बढ़ावा देकर… Read more »