इल्जाम

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वो इस कदर गुनगुनाने लगे है, के सुर भी शरमाने लगे है… हम इस कदर मशरूफ है जिंदगी की राहों में, के काटों पर से राह बनाने लगे है… इस कदर खुशियाँ मानाने लगे है, के बर्बादियों में भी मुस्कुराने लगे है… नज्म एसी गाने लगे है, की मुरझाए फूल खिलखिलाने लगे है… चाँद ऐसा… Read more »