मेरा एकालाप

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बोल उठी तब त्रिपुरसुंदरी
तू डूबे क्यों,क्यों पार तरे?

तेरे समस्त गान, रुदन औ’ हास
ऊँ नमो मणिपद्मे हुं का पाठ
तेरा प्रचलन मेरी प्रदक्षिणा
तेरा कुछ भी मेरा सबकुछ

ओ मेरे प्यारे अबोध शिशु
गोद भरे,तू मुझमें नित-नूतन मोद भरे।

हिमालय की दुर्दशा से पर्यावरण संकट में

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दिनेश पंत इस वर्ष देश में उम्मीद से कम और अनियमित वर्षा ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे की चिंता को बढ़ा दिया है। विकास और उन्नति के नाम पर औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। निवेश के बढ़ते अवसर ने गांव को भी तरक्की के नक्षे पर मजबूती से उकेरा है।… Read more »

हिमालय की गोद में छिपा है सस्‍ती दवाओं का खजाना

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स्‍टांजिंग कुंजांग आंग्‍मो वनस्पति न सिर्फ इंसानी जीवन बल्कि पृथ्वी पर वास करने वाले समस्त जीव जंतु के जीवन चक्र का एक अहम हिस्सा है। एक तरफ जहां यह वातावरण को शुद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है वहीं दूसरी तरफ इसकी कई प्रजातियां दवा के रूप में भी काम आती हैं। वन संपदा की… Read more »